जनगणना में खुलेगी प्रॉपर्टी टैक्स चोरी की पोल: मध्य प्रदेश के 55 लाख शहरी घरों का होगा सर्वे, जलकर और नल कनेक्शन की भी होगी जांच
मध्य प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर की वसूली को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ने 55 लाख शहरी घरों का व्यापक सर्वे कराने का फैसला किया है। इस सर्वे के दौरान न केवल संपत्तियों का रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा, बल्कि प्रॉपर्टी टैक्स, नल कनेक्शन और जलकर से जुड़ी जानकारी का भी सत्यापन किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस अभियान से टैक्स चोरी के मामलों का पता लगाने के साथ-साथ नगर निकायों के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
55 लाख घरों का होगा डोर-टू-डोर सर्वे
सरकार द्वारा कराए जाने वाले इस सर्वे में प्रदेश के सभी शहरी निकायों के करीब 55 लाख मकानों और भवनों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। सर्वे टीम घर-घर जाकर संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र करेगी और सरकारी रिकॉर्ड से उसका मिलान करेगी।
प्रॉपर्टी टैक्स की होगी जांच
सर्वे के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संपत्ति का सही तरीके से प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया जा रहा है या नहीं। यदि किसी मकान, दुकान या व्यावसायिक भवन का रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति से अलग पाया गया या टैक्स चोरी सामने आई, तो संबंधित संपत्ति का रिकॉर्ड अपडेट कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नल कनेक्शन और जलकर का भी होगा सत्यापन
सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स ही नहीं, बल्कि घरेलू और व्यावसायिक नल कनेक्शन, जल उपयोग और जलकर (वॉटर टैक्स) का भी सत्यापन किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि कितने उपभोक्ता बिना पंजीकरण या गलत श्रेणी में सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
नगर निकायों को होगा फायदा
सरकार का मानना है कि इस सर्वे से नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों के रिकॉर्ड अधिक सटीक होंगे। इससे राजस्व बढ़ेगा और शहरी विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
डिजिटल रिकॉर्ड भी होगा अपडेट
सर्वे के दौरान एकत्र की गई जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा, ताकि भविष्य में टैक्स निर्धारण, संपत्ति सत्यापन और नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता लाई जा सके।
टैक्स चोरी पर कसेगा शिकंजा
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से कई शहरी क्षेत्रों में संपत्तियों का सही मूल्यांकन नहीं होने और रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण नगर निकायों को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है। नए सर्वे से ऐसी अनियमितताओं की पहचान आसान होगी और टैक्स चोरी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
मध्य प्रदेश सरकार का यह अभियान शहरी प्रशासन में पारदर्शिता लाने और नगर निकायों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद संपत्तियों का अद्यतन डाटा उपलब्ध होगा, जिससे कर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

