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रिपोर्ट सामने आने से पहले ही रद्द हो गया था CEC ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा, 21 सितंबर को ही मिल गया था संकेत

रिपोर्ट सामने आने से पहले ही रद्द हो गया था CEC ज्ञानेश कुमार का यूपी दौरा, 21 सितंबर को ही मिल गया था संकेत

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बाद अब उनके उत्तर प्रदेश दौरे की टाइमलाइन भी चर्चा में है। अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर रिपोर्ट 23 सितंबर को सार्वजनिक हुई थी, लेकिन ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश दौरा इससे दो दिन पहले यानी 21 सितंबर को ही स्थगित कर दिया गया था। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आयोग के भीतर चल रही खींचतान की जानकारी रिपोर्ट सामने आने से पहले ही सामने आने लगी थी।

ज्ञानेश कुमार को 25 सितंबर को मेरठ और 28 सितंबर को वाराणसी जाना था। मेरठ में निर्वाचक साक्षरता क्लब और ईसीआईनेट के क्षेत्रीय सम्मेलन के साथ युवाओं से संवाद का कार्यक्रम प्रस्तावित था। इसके बाद वाराणसी में भी जेन-जी युवाओं के साथ संवाद होना था। दोनों कार्यक्रम अब स्थगित कर दिए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से दौरा स्थगित किए जाने का स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में कार्यक्रम की तैयारियां 21 सितंबर को ही रोक दी गई थीं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से संबंधित अधिकारियों को भेजे गए पत्र की तारीख भी 21 सितंबर बताई जा रही है। इसमें कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके पीछे की वजह का उल्लेख नहीं था।इसके बाद 23 सितंबर को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कई फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ मामलों में दोनों आयुक्तों की जानकारी या सहमति को लेकर सवाल उठे। ये मुद्दे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और मतदाता डेटा से जुड़े बताए गए हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन दावों पर अलग पक्ष रखा है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, बैठकों में किसी मुद्दे पर सवाल उठाना या टिप्पणी करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका कहना है कि अंतिम फैसलों के खिलाफ किसी चुनाव आयुक्त ने औपचारिक असहमति दर्ज नहीं कराई और संबंधित आदेशों पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में 21 सितंबर की तारीख इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि यूपी दौरा उसी दिन स्थगित किया गया था, जबकि आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट दो दिन बाद सार्वजनिक हुई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दौरा स्थगित करने का कारण आंतरिक मतभेद ही था या कोई अन्य प्रशासनिक वजह। इसलिए दोनों घटनाओं के बीच सीधा कारण-सम्बंध स्थापित करना अभी उचित नहीं होगा।फिलहाल चुनाव आयोग के कामकाज, SIR और तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले दिनों में आयोग की ओर से दौरा स्थगित किए जाने की वजह स्पष्ट किए जाने पर इस घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकती है।

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