CEC ज्ञानेश कुमार के घर ‘वोट चोर’ लिखने पर कांग्रेस नेताओं पर केस, 6 गिरफ्तार; जानलेवा हमले समेत कई धाराएं
उत्तर प्रदेश के आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर प्रदर्शन करना कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भारी पड़ा है। सोमवार को विजय नगर स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान गेट और दीवार पर स्प्रे पेंट से ‘वोट चोर’ और अन्य नारे लिखे गए। इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
होमगार्ड से मारपीट का भी आरोप
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान करीब 15 से 20 लोग आवास के बाहर पहुंचे थे। वहां तैनात होमगार्ड ने प्रदर्शनकारियों को परिसर में जाने से रोकने का प्रयास किया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उसे घेर लिया और उसके साथ मारपीट की। पुलिस का दावा है कि होमगार्ड के सिर पर लोहे की रॉड से वार किया गया, जिसके बाद वह घायल होकर बेहोश हो गया। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।
मामले में पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में जानलेवा हमला, रास्ता रोकना, सरकारी कार्य में बाधा, गृह अतिचार, दंगा, मारपीट और जान से मारने की धमकी समेत कई धाराएं लगाई गई हैं। मुकदमे में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 20 अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है।
दो कांग्रेस नेताओं समेत छह गिरफ्तार
पुलिस ने कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री संगठन अनिल यादव और मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर को गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों को आगरा से बाहर जाते समय जेवर टोल प्लाजा के पास पकड़ा गया। इसके बाद मामले में चार अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी की गई। पुलिस अब प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
गेट और दीवार पर लिखे गए नारे
प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर नारेबाजी की। इसके बाद कुछ लोगों ने काले स्प्रे और पेंट से ज्ञानेश कुमार के नाम के साथ ‘वोट चोर’ और अन्य आपत्तिजनक नारे दीवार और गेट पर लिख दिए। पुलिस ने बाद में इन नारों को मिटा दिया।
यह प्रदर्शन कांग्रेस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा था, जिसमें पार्टी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रही है। कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। दूसरी ओर, इन राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना गया है।
पुलिस की कार्रवाई अब मामले में दर्ज आरोपों, प्रदर्शन में शामिल लोगों और कथित मारपीट से जुड़े साक्ष्यों की जांच पर केंद्रित है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

