उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट चर्चा: आलू किसानों की समस्याएं और उद्योग स्थापना की मांग प्रमुख
उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान आलू किसानों की समस्याएं मुख्य मुद्दा बनीं। सदस्यों ने आलू के उचित मूल्य न मिलने पर चिंता व्यक्त की और आलू चिप्स फैक्ट्रियों तथा संबंधित उद्योगों की स्थापना की मांग की।
वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट को सत्ता पक्ष के सदस्यों ने ‘विश्वास और विकास’ का बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों, उद्योगों और आम जनता के हित में कई नए प्रावधान और योजनाएं लागू कर रही है। उनके अनुसार, बजट में किसानों के लिए विशेष पैकेज और निवेश बढ़ाने के प्रस्ताव शामिल हैं, जिससे कृषि उत्पादन और उद्योगिक विकास दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, विपक्ष ने बजट पर तीखा प्रहार करते हुए इसे ‘दिशाहीन’ और ‘गरीब विरोधी’ बताया। विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि बजट में गरीब किसानों और छोटे किसानों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आलू किसानों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई और कहा कि उचित मूल्य सुनिश्चित किए बिना कृषि क्षेत्र में स्थिरता नहीं आ सकती।
सदन में कई सदस्यों ने आलू के बाजार मूल्य और चिप्स उद्योग से जुड़े मुद्दों को उठाया। उनके अनुसार, आलू का उत्पादन करने वाले किसान अक्सर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी कम दाम में अपना उत्पादन बेचने को मजबूर होते हैं। इससे उनकी आय प्रभावित होती है और आर्थिक असमानता बढ़ती है। उन्होंने बजट में इस पर विशेष प्रावधान और किसानों को उद्योग से जोड़ने वाली योजनाओं की सिफारिश की।
बजट चर्चा के दौरान, कई सदस्यों ने सुझाव दिया कि राज्य में आलू प्रसंस्करण इकाइयों और चिप्स उद्योगों की स्थापना की जाए। उनका कहना था कि इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, रोजगार सृजन होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में आलू का उत्पादन उच्च स्तर पर है, लेकिन किसानों को उत्पाद का उचित मूल्य और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बजट में यदि किसानों के लिए पर्याप्त निवेश और उद्योगिक प्रावधान किए जाएं तो कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्र में समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
बजट पर चर्चा के दौरान सदन में कृषि और ग्रामीण विकास के अन्य मुद्दों पर भी विचार हुआ। कई सदस्यों ने कहा कि बजट को गरीब विरोधी न मानते हुए, इसे किसानों और उद्योगों को जोड़ने वाले प्रावधानों के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। वहीं विपक्ष ने इसे आम जनता और छोटे किसानों के दृष्टिकोण से अपर्याप्त बताया।
कुल मिलाकर, विधानसभा में बजट चर्चा ने आलू किसानों की समस्याओं और उद्योग स्थापना के महत्व को सामने लाया। अब यह देखना होगा कि सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में किसानों के लिए उचित मूल्य और उद्योगिक योजनाओं को लागू करने में कितनी तेजी दिखाती है।

