सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, 2 साल के भीतर दूसरी बार मातृत्व अवकाश लेने पर रोक नहीं
सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं के लिए हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दो साल के भीतर दूसरी बार मातृत्व अवकाश लेने पर कोई रोक नहीं है। पहले और दूसरे मातृत्व अवकाश के बीच दो साल का अंतर होना जरूरी नहीं है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश से जुड़े नियमों में ऐसी कोई अनिवार्य शर्त नहीं है, जिसके तहत महिला कर्मचारी को दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष का अंतर रखना ही पड़े।
दो साल का अंतर जरूरी नहीं
अदालत के इस फैसले से उन महिला सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके दो बच्चों के जन्म के बीच दो साल से कम का अंतर है। ऐसी महिलाओं को केवल इस आधार पर दूसरे मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता कि उन्होंने पहले मातृत्व अवकाश के दो साल के भीतर दोबारा अवकाश का आवेदन किया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य महिला कर्मचारी को प्रसव के दौरान और उसके बाद पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। इसे ऐसी शर्त से नहीं जोड़ा जा सकता, जिसका नियमों में स्पष्ट प्रावधान ही नहीं है।
महिला कर्मचारियों के अधिकार पर जोर
अदालत ने अपने फैसले में महिला कर्मचारियों के अधिकारों और मातृत्व से जुड़े प्रावधानों को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में कार्यरत महिला को नियमों के तहत मिलने वाले मातृत्व अवकाश से केवल अंतराल के आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता।
इस फैसले को कामकाजी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर उन महिला कर्मचारियों के लिए यह राहत भरा निर्णय है, जिनके बच्चों के जन्म के बीच अपेक्षाकृत कम अंतर है।
नियमों की गलत व्याख्या नहीं हो सकती
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित सेवा नियमों में दो मातृत्व अवकाश के बीच दो साल का अंतर रखने की कोई शर्त नहीं है, तो प्रशासन अपनी ओर से ऐसी बाध्यता नहीं लगा सकता।
इस फैसले से सरकारी विभागों में मातृत्व अवकाश को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। महिला कर्मचारी अब निर्धारित नियमों के तहत मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन कर सकेंगी और केवल दो साल से कम अंतर होने के आधार पर उनका आवेदन खारिज नहीं किया जा सकेगा।
हाईकोर्ट का यह फैसला महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकार और कार्यस्थल पर लैंगिक समानता के लिहाज से अहम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मातृत्व अवकाश के बीच दो साल का अंतर अनिवार्य बताने वाली शर्त तभी लागू हो सकती है, जब उसका स्पष्ट कानूनी आधार मौजूद हो।

