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ग्रेटर नोएडा में सिस्टम की बड़ी लापरवाही! 6 साल के आव्यान की मौत ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल, 5 लोगों की भूमिका पर उठे सवाल

ग्रेटर नोएडा में सिस्टम की बड़ी लापरवाही! 6 साल के आव्यान की मौत ने खोली सुरक्षा इंतजामों की पोल, 5 लोगों की भूमिका पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 6 साल के मासूम आव्यान की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम और निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही को बेनकाब कर दिया है। इस हादसे के बाद सामने आई शुरुआती जांच में पांच लोगों की सीधी लापरवाही उजागर हुई है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते निरीक्षण भी नहीं किया। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

मामले की जांच में सामने आया कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी नहीं की। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने निर्माण स्थलों का निरीक्षण कराने और सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने में गंभीर लापरवाही बरती। यदि समय-समय पर निरीक्षण होता और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया। निर्माण स्थल को सुरक्षित बनाने, बैरिकेडिंग करने और आम लोगों, खासकर बच्चों की पहुंच रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। यही लापरवाही मासूम आव्यान के लिए जानलेवा साबित हुई।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पांच लोगों की जिम्मेदारी तय की गई है। इनमें प्राधिकरण के अधिकारी, संबंधित इंजीनियर और निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदार लोग शामिल हैं। सभी की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर सुरक्षा नियमों की लगातार अनदेखी की जाती है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण नहीं करते, जिससे ऐसे हादसे बार-बार सामने आते हैं।

आव्यान की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े, इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन कौन सुनिश्चित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्यों के दौरान नियमित निरीक्षण, मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए।

फिलहाल प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यह हादसा सरकारी तंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।

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