Samachar Nama
×

यूपी चकबंदी विभाग में बड़ा एक्शन, भ्रष्ट और अयोग्य अधिकारियों को दी जाएगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

यूपी चकबंदी विभाग में बड़ा एक्शन, भ्रष्ट और अयोग्य अधिकारियों को दी जाएगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

उत्तर प्रदेश सरकार चकबंदी विभाग में पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। विभाग ने भ्रष्टाचार और खराब कार्यप्रदर्शन वाले अधिकारियों की पहचान कर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कदम का उद्देश्य चकबंदी कार्यों में तेजी लाना और किसानों को समय पर लाभ पहुंचाना है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों का रिकॉर्ड खंगाल रहा है, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार, लापरवाही, अनुशासनहीनता या लगातार खराब कार्यप्रदर्शन की शिकायतें रही हैं। इन अधिकारियों की सेवा पुस्तिका, गोपनीय आख्या (एसीआर) और विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि चकबंदी से जुड़े मामलों के लंबित रहने से किसानों और ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रहती हैं, जिससे भूमि विवाद और प्रशासनिक समस्याएं बढ़ती हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।

चकबंदी विभाग में भूमि पुनर्गठन, खेतों का पुनर्विन्यास और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी विवादों के निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। सरकार का मानना है कि यदि विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी तो चकबंदी प्रक्रिया में तेजी आएगी और किसानों को राहत मिलेगी।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा के बाद जिन अधिकारियों को जनहित के अनुरूप सेवा के लिए उपयुक्त नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का विकल्प भी शामिल है।

सरकार की इस पहल को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि विभाग में कार्यसंस्कृति सुधारने और लंबित मामलों के निस्तारण में भी तेजी आने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विभागों में नियमित समीक्षा और जवाबदेही तय करने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है। चकबंदी विभाग में प्रस्तावित यह कार्रवाई भी इसी दिशा में एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।

अब विभागीय समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने अधिकारियों पर कार्रवाई की जाती है और इसका चकबंदी कार्यों की गति पर कितना प्रभाव पड़ता है।

Share this story

Tags