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कानपुर में मेडिकल क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: बुजुर्ग मरीज को बिना चीरफाड़ के लगाया गया ‘लीडलेस पेसमेकर’

कानपुर में मेडिकल क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि: बुजुर्ग मरीज को बिना चीरफाड़ के लगाया गया ‘लीडलेस पेसमेकर’

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान में डॉक्टरों ने एक महत्वपूर्ण चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। यहां 77 वर्षीय बुजुर्ग मरीज को अत्याधुनिक तकनीक से बिना किसी बड़े ऑपरेशन के, पैर की नस के रास्ते कैप्सूल जितना छोटा और बिना तार वाला पेसमेकर लगाया गया।

यह प्रक्रिया आधुनिक कार्डियक टेक्नोलॉजी का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक सर्जरी की तुलना में शरीर पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है। इस तरह के पेसमेकर को “लीडलेस पेसमेकर” कहा जाता है, जो सीधे दिल में फिट होकर हार्टबीट को नियंत्रित करने में मदद करता है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस तकनीक में छाती को चीरने या बड़े ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती, जिससे मरीज को जल्दी रिकवरी मिलती है और संक्रमण का खतरा भी काफी कम हो जाता है। यह प्रक्रिया खासतौर पर बुजुर्ग और कमजोर मरीजों के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है।

यह उपचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत पूरी तरह नि:शुल्क किया गया, जिससे मरीज को आर्थिक बोझ से भी राहत मिली।

इस उपलब्धि के बाद संस्थान को कार्डियोलॉजी क्षेत्र में “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की तकनीक भारत में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के बढ़ते स्तर को दर्शाती है।

चिकित्सकों ने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत स्थिर है और वह सामान्य जीवन की ओर तेजी से लौट रहा है। यह तकनीक भविष्य में हार्ट पेशेंट्स के इलाज को और भी सुरक्षित और आसान बना सकती है।

कुल मिलाकर, यह उपलब्धि न सिर्फ कानपुर के लिए बल्कि पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जो दिखाती है कि अब भारत में भी विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है।

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