Bareilly में फर्जी बिल बनाकर भुगतान करने के आरोपी रोडवेज के सेवा प्रबंधक निलंबित, ARM पर भी कार्रवाई की संस्तुति
बरेली में कंपनियों के नाम से फर्जी बिल बनाने के आरोप में रोडवेज के सेवा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है। अमर उजाला के खुलासे के बाद शासन और परिवहन निगम ने इस मामले को संज्ञान में लिया है। साथ ही पीलीभीत, बरेली और रुहेलखंड डिपो के एआरएम के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है। परिवहन निगम मुख्यालय के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर की ओर से आदेश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि सेवा प्रबंधक धनजी राम ने अपने कर्तव्यों और दायित्वों के निर्वहन में घोर उदासीनता बरती है। बसों के रखरखाव में पाई गई अनियमितताओं की जांच में सहयोग न करके, रखरखाव के अभाव में बसों को न चलाकर लोगों के मन में निगम की छवि धूमिल की है, टेंडर प्रक्रिया पूरी किए बिना अनाधिकृत कंपनियों से काम लेकर और कंपनियों के नाम से फर्जी बिल बनाकर भुगतान प्राप्त कर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। साथ ही जारी आदेशों, निर्देशों आदि का अनुपालन न करने के मामलों में उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वहीं निलंबन के दौरान उन्हें प्रमुख मुख्य प्रबंधक (तकनीकी) परिवहन निगम मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया, जिसके बाद मामले में कार्रवाई की गई
भ्रष्टाचारियों के खुलासे को लेकर अमर उजाला में नवंबर और दिसंबर में प्रकाशित खबर का शासन ने भी संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया तो 16 दिसंबर 2024 को परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को मामले की जांच के निर्देश दिए। इस मामले में रोडवेज कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ मुख्यालय को स्पष्टीकरण भेजने में अधिकारियों को काफी पसीना बहाना पड़ा। वहीं करीब 150 बसों की मरम्मत के फर्जी बिलों का भी खुलासा हुआ।
पांच माह बाद हो सकती है कार्रवाई
दरअसल, रोडवेज में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर बसों के इंटन, गियर बॉक्स, पंप बदलने के नाम पर रिश्वतखोरी के मामले उजागर हुए थे। साथ ही बसों की मरम्मत का भुगतान फर्जी बिलों के जरिए करने का मामला साक्ष्यों के साथ साबित करने वाली खबरें भी प्रकाशित हुई थीं। पिछले साल नवंबर और दिसंबर में लगातार यह खबर प्रकाशित होने के बाद ही मामले की जांच शुरू की गई थी। अब पांच महीने बाद इन मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है।

