बरेली के मटकुला गांव में होली से ठीक पहले दीपांकर मिश्रा ने आर्थिक तंगी और ठेकेदार द्वारा मजदूरी न दिए जाने से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।
सूत्रों के अनुसार, दीपांकर आंध्र प्रदेश में काम करने गया था। वहां उसे और उसके साथियों को ठेकेदार ने धोखा दिया और मेहनताना नहीं दिया। इसके बाद भी उसने पुलिस और जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पर्याप्त राहत या कार्रवाई नहीं मिलने से वह निराश हो गया।
स्थानीय ग्रामीणों और परिवार के अनुसार, दीपांकर की स्थिति लगातार तनावपूर्ण थी। आर्थिक समस्याओं और कामगारों के हक न मिलने की वजह से उसने यह दुखद कदम उठाया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी और ठेकेदारों द्वारा आर्थिक शोषण से ऐसे मामलों में जोखिम बढ़ जाता है। परिवार और प्रशासन को मिलकर पीड़ितों के लिए राहत और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है।
बरेली का यह मामला मजदूरों की सुरक्षा, मजदूरी के हक और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की अहमियत को उजागर करता है। दीपांकर मिश्रा की दुखद मौत सामाजिक और प्रशासनिक चेतावनी के रूप में सामने आई है।

