पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 9 अधूरे निर्माणों का आकलन, ऑडिटोरियम समेत 4 भवन गिराए जाएंगे
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर में वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय परिसर में अधूरी पड़ी 9 निर्माण परियोजनाओं का आकलन कराया गया है। इनमें से तकनीकी जांच और निर्माण की स्थिति के आधार पर 4 भवनों को गिराने का फैसला लिया गया है। इनमें ऑडिटोरियम, बायोटेक भवन और इंडोर स्टेडियम समेत अन्य निर्माण शामिल बताए जा रहे हैं।
इन निर्माणों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। कई परियोजनाएं शुरू होने के बाद पूरी नहीं हो सकीं, जबकि कुछ भवनों की स्थिति समय बीतने के साथ खराब हो गई। अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन अधूरे निर्माणों की स्थिति का मूल्यांकन कराकर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
9 निर्माणों की स्थिति का किया गया आकलन
विश्वविद्यालय परिसर में अलग-अलग समय पर शुरू की गई नौ निर्माण परियोजनाओं को जांच के दायरे में लिया गया। इनकी वर्तमान स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता, ढांचे की मजबूती और दोबारा निर्माण पूरा कराने की व्यवहारिकता का आकलन किया गया।
जांच के दौरान यह देखा गया कि किन भवनों को मौजूदा ढांचे के आधार पर पूरा किया जा सकता है और किन निर्माणों को आगे उपयोग में लाना सुरक्षित या व्यावहारिक नहीं होगा। इसी आकलन के बाद चार भवनों को गिराने की दिशा में निर्णय लिया गया है।
ऑडिटोरियम और बायोटेक भवन भी शामिल
गिराए जाने वाले निर्माणों में विश्वविद्यालय का ऑडिटोरियम और बायोटेक भवन भी शामिल हैं। इसके अलावा इंडोर स्टेडियम समेत अन्य अधूरे भवनों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इन भवनों का निर्माण पूरा न होने के कारण विश्वविद्यालय को अपेक्षित सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सका।
अब पुराने और अनुपयोगी ढांचों को हटाकर परिसर में नई योजनाओं के तहत निर्माण की संभावना तलाशी जा रही है। इससे जमीन का दोबारा उपयोग किया जा सकेगा और विश्वविद्यालय की जरूरत के अनुसार आधुनिक सुविधाएं विकसित करने का रास्ता साफ होगा।
वर्षों से अधूरे पड़े थे निर्माण
विश्वविद्यालय में विभिन्न योजनाओं के तहत निर्माण कार्य शुरू किए गए थे, लेकिन अलग-अलग कारणों से कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं। निर्माण कार्य लंबे समय तक रुके रहने के कारण कुछ भवनों की हालत भी खराब होती गई।
अधूरे निर्माणों पर खर्च हुई राशि और उनके उपयोग को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है। अब प्रशासन का फोकस इन परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट करने और अनुपयोगी ढांचों के संबंध में निर्णय लेने पर है।
नए निर्माण का रास्ता होगा साफ
चार भवनों को हटाए जाने के बाद संबंधित स्थानों पर नए निर्माण की योजना बनाई जा सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन की प्राथमिकता परिसर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए विद्यार्थियों और शिक्षकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
फिलहाल नौ अधूरे निर्माणों के आकलन के बाद चार भवनों को गिराने का फैसला विश्वविद्यालय परिसर में अधूरी परियोजनाओं को लेकर आगे की कार्रवाई का संकेत है। अब इन भवनों को हटाने की प्रक्रिया और नए निर्माण से जुड़ी योजनाओं पर अगला निर्णय लिया जाएगा।

