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कलाकारों ने रावण के चरित्र पर रखी अपनी राय

कलाकारों ने रावण के चरित्र पर रखी अपनी राय

रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले कलाकारों का कहना है कि रावण का चरित्र केवल बुराई का प्रतीक नहीं, बल्कि विद्वता, शक्ति और अहंकार के बीच के अंतर को भी समझाता है। उनका मानना है कि रावण के हृदय में श्रीराम के प्रति भक्ति थी, लेकिन सीता हरण और अहंकार के कारण उसका अंत हुआ।

कलाकारों ने आज के समाज से तुलना करते हुए कहा कि पहले सीता हरण की कथा सुनाई जाती थी, जबकि आज महिलाओं के अपहरण और अपराध की खबरें सामने आती हैं। उनके मुताबिक, समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

भ्रष्टाचार पर भी उठाए सवाल

कलाकारों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर रावण आज चुनाव लड़ता, तो शायद भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करता। यह टिप्पणी मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर कटाक्ष के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि, यह कलाकारों की राय है, कोई तथ्यात्मक राजनीतिक दावा नहीं।

रामलीला के मंचन के जरिए कलाकार हर साल दर्शकों को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। रामायण की कथा में रावण का अंत अहंकार, अन्याय और अधर्म के परिणाम के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

रामलीला से समाज को संदेश

रामलीला केवल धार्मिक कथा का मंचन नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और नैतिकता पर विचार करने का माध्यम भी है। श्रीराम का आदर्श, रावण की विद्वता और उसके अहंकार से जुड़ी कथा लोगों को सही आचरण अपनाने की प्रेरणा देती है।

कलाकारों का कहना है कि त्योहारों का उद्देश्य केवल परंपराओं का निर्वहन करना नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प लेना भी है। भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और अन्याय जैसी समस्याओं से निपटने के लिए समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।

विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। कलाकारों के विचारों का संदेश भी यही है कि असली बदलाव केवल पुतला जलाने से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और समाज की व्यवस्था में सुधार लाने से आएगा।

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