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प्रयागराज के SRN अस्पताल में बढ़े गुदा रोग के मरीज, रोजाना 30 तक महिलाएं पहुंच रहीं इलाज के लिए

प्रयागराज के SRN अस्पताल में बढ़े गुदा रोग के मरीज, रोजाना 30 तक महिलाएं पहुंच रहीं इलाज के लिए

गलत खान-पान और बिगड़ती जीवनशैली का असर अब महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों गुदा संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिला मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में रोजाना करीब 25 से 30 महिलाएं भगंदर (फिस्टुला), पाइल्स (बवासीर) और गुदा से जुड़ी अन्य समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रही हैं।

चिकित्सकों के अनुसार, महिलाओं में इन समस्याओं के बढ़ने का प्रमुख कारण खान-पान में लापरवाही, फाइबर युक्त भोजन की कमी, कम पानी पीना और लंबे समय तक बैठकर काम करना है। इसके अलावा अव्यवस्थित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इन बीमारियों को बढ़ावा दे रही है।

SRN अस्पताल की ओपीडी में आने वाली कई महिला मरीज लंबे समय से दर्द, कब्ज, रक्तस्राव और असहजता जैसी परेशानियों से जूझ रही होती हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। चिकित्सक मरीजों को शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाइल्स, फिस्टुला और अन्य गुदा रोगों से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार जरूरी है। नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीना, हरी सब्जियों और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना तथा रोजाना शारीरिक गतिविधि करना काफी मददगार साबित हो सकता है।

डॉक्टरों के मुताबिक, महिलाओं में प्रसव के बाद भी कब्ज और गुदा संबंधी समस्याओं की शिकायत बढ़ सकती है। कई महिलाएं शर्म या झिझक के कारण समय पर चिकित्सक से सलाह नहीं लेतीं, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है।

अस्पताल के चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि यदि मल त्याग के समय दर्द, खून आना, लगातार कब्ज या गुदा क्षेत्र में सूजन जैसी समस्या हो तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती चरण में इलाज कराने से बीमारी को नियंत्रित करना आसान होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली के कारण केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा वर्ग और महिलाएं भी इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में खान-पान और दिनचर्या में सुधार कर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

फिलहाल SRN अस्पताल की ओपीडी में बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए चिकित्सक लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दे रहे हैं, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार किया जा सके।

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