कोडीन कफ सिरप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मेडिकल इस्तेमाल पर नहीं लगेगा NDPS; 19 आरोपियों की जमानत खारिज
प्रयागराज से कोडीन युक्त कफ सिरप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल यदि वास्तविक रूप से चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, तो केवल इस आधार पर उसे NDPS यानी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट के दायरे में नहीं लाया जा सकता। हालांकि, दवा को नशे के लिए अवैध तरीके से डायवर्ट करने, जमा करने या बेचने पर NDPS कानून लागू होगा।
80 जमानत याचिकाओं पर हुई सुनवाई
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने कोडीन युक्त कफ सिरप के कथित अवैध भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में जमानत याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान 19 कथित मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
वहीं, ट्रक चालकों, सहायकों और कुछ छोटे कारोबारियों को राहत दी गई। कोर्ट ने माना कि कुछ लोगों की भूमिका केवल सीलबंद पार्सल के परिवहन तक सीमित थी या उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि बक्सों में कफ सिरप छिपाकर ले जाया जा रहा है।
मेडिकल इस्तेमाल और नशे के लिए बिक्री में अंतर
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कोडीन आधारित कफ सिरप के वैध चिकित्सीय इस्तेमाल और उसके अवैध इस्तेमाल के बीच अंतर को स्पष्ट किया। कोर्ट के मुताबिक, निर्धारित शर्तों के तहत चिकित्सीय या वैज्ञानिक उद्देश्य से इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी दवा को NDPS Act के तहत प्रतिबंधित मादक पदार्थ नहीं माना जाएगा।
लेकिन यदि यही दवा नशे या गलत इस्तेमाल के लिए मेडिकल सप्लाई चेन से बाहर कर दी जाती है और उसका अवैध भंडारण या कारोबार किया जाता है, तो NDPS Act की धाराएं लागू हो सकती हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल लाइसेंस होने से अवैध डायवर्जन को कानूनी संरक्षण नहीं मिल जाता।
छोटे विक्रेताओं और ट्रांसपोर्टरों को राहत
इस मामले में कोर्ट ने आरोपियों की भूमिका को अलग-अलग आधार पर देखा। जिन लोगों के खिलाफ संगठित तरीके से अवैध कारोबार में शामिल होने के पर्याप्त आरोप और सामग्री सामने आई, उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया। दूसरी ओर, जिन ड्राइवरों, सहायकों या छोटे विक्रेताओं की भूमिका सीमित थी और जिनके खिलाफ यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें अवैध गतिविधि की जानकारी थी, उन्हें राहत दी गई।
NDPS के नाम पर हर मामले में FIR पर भी सवाल
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कोडीन कफ सिरप से जुड़े हर नियामकीय उल्लंघन को स्वतः NDPS अपराध नहीं माना जा सकता। एक अन्य संबंधित आदेश में हाईकोर्ट ने कहा है कि निर्धारित मात्रा वाला कोडीन कफ सिरप यदि सामान्य मेडिकल बिक्री में नियमों के उल्लंघन के साथ बेचा जाता है, तो मामला Drugs and Cosmetics Act के तहत हो सकता है; हालांकि बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में बिक्री जैसी परिस्थितियां नशे के लिए इस्तेमाल या जानकारी का संकेत दे सकती हैं।
इस फैसले से कोडीन आधारित कफ सिरप से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी दिशा सामने आई है। अब यह देखना अहम होगा कि किसी मामले में दवा का वास्तविक इस्तेमाल चिकित्सीय था या उसे जानबूझकर नशे और अवैध कारोबार के लिए डायवर्ट किया गया था।

