दो साल के मासूम अभिमन्यु की हत्या मामले में सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की अपील
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो साल के मासूम बच्चे अभिमन्यु की हत्या के मामले में दोषी सौतेले पिता प्रदीप उर्फ अमन को कोई राहत नहीं दी है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के 27 मई 2022 के फैसले को सही माना। खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं, इसलिए सजा में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
मामले के अनुसार, दो वर्षीय अभिमन्यु की हत्या के आरोप में उसके सौतेले पिता प्रदीप उर्फ अमन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई और अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अपील में सजा को चुनौती देते हुए आरोपी पक्ष ने कई दलीलें पेश कीं और राहत की मांग की। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपील का विरोध किया गया।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले से जुड़े साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर दिया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद अब दोषी प्रदीप उर्फ अमन को उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी। हाईकोर्ट के आदेश से निचली अदालत के निर्णय पर भी मुहर लग गई है।
यह मामला मासूम बच्चे की हत्या से जुड़ा होने के कारण काफी संवेदनशील माना गया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पीड़ित पक्ष को न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली है। वहीं, कानूनी जानकारों के अनुसार, इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि गंभीर आपराधिक मामलों में अदालतें साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को बनाए रखती हैं।

