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UP पंचायत चुनाव टालने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: सरकार से सवाल, ‘प्रधानों को प्रशासक कैसे बनाया?

UP पंचायत चुनाव टालने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: सरकार से सवाल, ‘प्रधानों को प्रशासक कैसे बनाया?

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टाले जाने और ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई है। इस पूरे मुद्दे पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक किस आधार पर बनाया गया और यह निर्णय किस कानूनी प्रावधान के तहत लिया गया।

हाईकोर्ट ने जताई सख्त आपत्ति

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कदम पहले दिए गए डिविजन बेंच के आदेश का उल्लंघन प्रतीत होता है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ है, तो यह मामला अदालत की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।

पंचायत चुनाव टालने पर सवाल

मामले में मुख्य मुद्दा पंचायत चुनावों को समय पर न कराए जाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अस्थायी रूप से बदलने का है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह प्रशासक नियुक्त करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

सरकार से जवाब तलब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस पूरे निर्णय पर विस्तृत जवाब मांगा है और यह स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया गया। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की अगली सुनवाई में सरकार को ठोस कानूनी आधार पेश करना होगा।

फिलहाल इस मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है। पंचायत चुनावों को लेकर उठे सवालों के बीच अब सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर टिकी हैं।

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