कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चिकित्सीय इस्तेमाल पर NDPS कानून लागू नहीं होगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े मामलों में अहम निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल केवल चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और यह वैध चिकित्सा उपयोग के दायरे में आता है, तो ऐसे मामलों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट यानी NDPS कानून के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
हाईकोर्ट ने यह फैसला कोडीन युक्त कफ सिरप से जुड़े करीब 80 जमानत आवेदनों पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि किसी दवा में कोडीन की मौजूदगी मात्र से उसे NDPS अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि दवा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है और क्या वह नियमों के अनुसार चिकित्सीय उपयोग के लिए है।
कोर्ट ने चिकित्सीय उपयोग को माना महत्वपूर्ण आधार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कोडीन एक ऐसा पदार्थ है जिसका इस्तेमाल कई दवाओं में चिकित्सकीय जरूरतों के लिए किया जाता है। कई कफ सिरप में इसकी निर्धारित मात्रा मौजूद होती है और डॉक्टर की सलाह पर इसका उपयोग किया जाता है। ऐसे मामलों में केवल दवा में कोडीन होने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के लिए किया जा रहा है या बिना अनुमति के उसका भंडारण, परिवहन या बिक्री की जा रही है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
अवैध कारोबार पर सख्ती जारी रहेगी
कोर्ट का यह फैसला अवैध रूप से कोडीन युक्त कफ सिरप के कारोबार में शामिल लोगों के लिए राहत नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध व्यापार को रोकना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर दवाओं की बिक्री करता है या उनका गलत इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
देश में लंबे समय से कोडीन युक्त कफ सिरप के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई जाती रही है। कई मामलों में ऐसे सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है, जिसके चलते प्रशासन और जांच एजेंसियां इस पर नजर रखती हैं।
80 जमानत याचिकाओं पर एक साथ हुई सुनवाई
इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष बड़ी संख्या में जमानत याचिकाएं लंबित थीं। अदालत ने सभी 80 मामलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए कानून की स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट के इस फैसले से उन लोगों को राहत मिल सकती है जिन पर केवल चिकित्सीय उपयोग वाली कोडीन युक्त दवाओं के आधार पर NDPS कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसियों को भी मामलों में यह अंतर स्पष्ट रूप से देखना होगा कि दवा का उपयोग वैध चिकित्सा उद्देश्य के लिए किया जा रहा था या फिर उसका दुरुपयोग किया गया। यह निर्णय कोडीन युक्त कफ सिरप से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दिशा-निर्देश माना जा रहा है।

