संभल में ताजिया जुलूस के नए मार्ग को लेकर दायर याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी विशेष मार्ग से धार्मिक जुलूस निकालना मौलिक अधिकार नहीं माना जा सकता।
प्रशासन के फैसले को बताया सही
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में प्रशासन द्वारा तय किया गया मार्ग उचित है और उसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
2023 के समझौते का पालन जरूरी
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 2023 में हुए आपसी समझौते का पालन करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि पूर्व में तय किए गए नियमों और सहमति के आधार पर ही जुलूस का संचालन होना चाहिए।
कानून-व्यवस्था पर दिया जोर
फैसले में कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी है।
फैसले के बाद स्थिति स्पष्ट
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद जुलूस के रूट को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल खत्म होता नजर आ रहा है। प्रशासन अब तय व्यवस्था के अनुसार ही आयोजन कराएगा।

