अलीगंज अग्निकांड: 2016 में ही ध्वस्तीकरण का आदेश, फिर कैसे चलता रहा अवैध कॉम्प्लेक्स? 15 मौतों के बाद खुली प्रशासनिक लापरवाही की परतें
अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने न सिर्फ 15 युवाओं की जान ले ली, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस तीन मंजिला भवन में आग लगी, उसे वर्षों पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था।
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए बने इस भवन का वर्ष 2014 में कथित रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया गया था। यहां पेट शॉप, लाइब्रेरी और एनिमेशन सेंटर जैसे संस्थान संचालित किए जा रहे थे।
2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश
सूत्रों के मुताबिक, Lucknow Development Authority ने वर्ष 2016 में भवन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसे ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। आरोप है कि भवन का उपयोग निर्धारित मानकों और स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया जा रहा था।
हालांकि, ध्वस्तीकरण का आदेश जारी होने के बावजूद भवन पर कार्रवाई नहीं हुई और कुछ ही समय बाद आदेश निरस्त कर दिया गया।
भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच उठे सवाल
मामले में यह सवाल उठ रहा है कि जब भवन को अवैध मानते हुए कार्रवाई का आदेश दिया गया था, तो उसे निरस्त किस आधार पर किया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या उस समय संबंधित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की थी या किसी स्तर पर मिलीभगत और भ्रष्टाचार की भूमिका रही।
हादसे के बाद पुराने रिकॉर्ड और फाइलों को खंगाला जा रहा है।
15 युवाओं की मौत ने झकझोरा
अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। अधिकांश पीड़ित युवा थे, जो भवन में संचालित संस्थानों से जुड़े हुए थे। इस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाती, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।
16 तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी
जांच एजेंसियां अब उस समय के अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, भवन से जुड़े मामलों में निर्णय लेने वाले करीब 16 तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
यदि जांच में लापरवाही, नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
SIT और प्रशासनिक जांच जारी
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर गठित SIT पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के दायरे में भवन स्वामी, संस्थान संचालक, फायर सेफ्टी से जुड़े अधिकारी और विकास प्राधिकरण के पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं।
जवाबदेही तय करने की मांग
हादसे के बाद आम लोगों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि केवल भवन मालिकों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए जिन्होंने वर्षों तक अवैध गतिविधियों पर आंखें मूंदे रखीं।
अलीगंज अग्निकांड अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी नियोजन की विफलता का बड़ा मामला बनता जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

