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मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर सहारनपुर में अखिलेश यादव के पोस्टर, सियासी हलचल तेज

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर सहारनपुर में अखिलेश यादव के पोस्टर, सियासी हलचल तेज

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी के बीच सहारनपुर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए जाने का मामला सामने आया है। पोस्टरों में 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़ी तस्वीरों और संदेशों का इस्तेमाल किया गया है, जिसके बाद इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

जानकारी के मुताबिक, सहारनपुर में लगाए गए पोस्टरों पर "न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे" जैसे संदेश लिखे गए थे। पोस्टरों में अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ मुजफ्फरनगर दंगों की घटनाओं का जिक्र किया गया है। दंगों की बरसी के मौके पर ऐसे पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

पुलिस ने हटवाए पोस्टर, जांच शुरू

पोस्टर लगाए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें हटवा दिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये पोस्टर किसने लगाए और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका है। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टर लगाने वालों की पहचान होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

सहारनपुर में पहले से गर्म है सियासी माहौल

सहारनपुर में हाल के दिनों में कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज रही हैं। इसी बीच मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टर सामने आने से सियासी बहस और तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि सहारनपुर में सपा समेत विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले भी ये पोस्टर चर्चा में आए। पोस्टरों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

2013 के मुजफ्फरनगर दंगों की फिर चर्चा

साल 2013 में मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार थी। विपक्ष ने तत्कालीन सरकार की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे, जबकि सपा इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।

दंगों की बरसी पर लगाए गए पोस्टरों ने एक बार फिर उस दौर की राजनीतिक बहस को हवा दे दी है। अब पुलिस जांच के साथ-साथ इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार है।

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