राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी का मामला गरमाया, वीडियो में जाने अखिलेश यादव ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
अयोध्या के Ayodhya स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के आरोपों ने एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने बुधवार को इस मुद्दे को दोबारा उठाते हुए इसे “चढ़ावा चोरी कांड” बताया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि देश की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में आखिर सच्चाई क्या है और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर वास्तव में चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है तो उसे छिपाने के बजाय सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि चढ़ावे में कथित चोरी करने वालों को कौन बचा रहा है और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका है।सपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि अगर प्रशासन के पास सीसीटीवी फुटेज मौजूद है तो उसे सार्वजनिक करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, पारदर्शिता ही इस विवाद को खत्म करने का सबसे सही तरीका है। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और मंत्री रहे Pawan Pandey ने रविवार, 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर में चढ़ावे से लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये तक की कथित चोरी हुई है। इस बयान के बाद से ही राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
दूसरी ओर, इस मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे गंभीर आरोप बताते हुए जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहे हैं।मामले के तूल पकड़ने के बाद धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है। Uttar Pradesh की राजनीति में यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है और विपक्ष सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब देने की मांग कर रहा है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस कथित चोरी के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, विपक्ष लगातार पारदर्शी जांच और सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग कर रहा है
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, चढ़ावे के प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और मंदिर प्रशासन इस पर क्या आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करते हैं और क्या जांच की कोई प्रक्रिया आगे बढ़ती है या नहीं।

