कार में अगवा कर रेप का आरोप, न्यूड वीडियो बनाने की शिकायत; गाजियाबाद की नर्स बोली- अस्पताल में भर्ती रही, पुलिस ने 1.50 लाख देकर मामला दबाने को कहा
गाजियाबाद में एक नर्स ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत की है। नर्स का आरोप है कि उसे कार में अगवा करने के बाद उसके साथ रेप किया गया और आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए। पीड़िता के मुताबिक, घटना के बाद उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। महिला ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
नर्स का आरोप है कि आरोपी उसे जबरन कार में बैठाकर ले गया। इसके बाद उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। महिला का दावा है कि इस दौरान उसका आपत्तिजनक वीडियो भी बनाया गया। वीडियो के जरिए उसे डराने और धमकाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप है।
पीड़िता के मुताबिक, घटना के बाद उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और कई दिनों तक उसका उपचार चला। अस्पताल से बाहर आने के बाद महिला ने मामले में कार्रवाई की मांग की।
मामले में सबसे गंभीर आरोप पुलिस की भूमिका को लेकर लगाए गए हैं। नर्स का दावा है कि उसने पुलिस के सामने अपनी शिकायत रखी, लेकिन उसकी बात पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। महिला के अनुसार, पुलिस की ओर से कथित तौर पर उसे 1.50 लाख रुपये देकर मामला खत्म करने और वापस जाने के लिए कहा गया।
हालांकि पुलिस की ओर से महिला द्वारा लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि क्या मामले में एफआईआर दर्ज हुई है, किन धाराओं में कार्रवाई की गई और पुलिस ने महिला को कथित रकम देने की पेशकश किस आधार पर की। इन सभी सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यौन अपराध से जुड़े मामलों में पीड़िता की शिकायत, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। यदि आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाने का आरोप है तो पुलिस उसके डिजिटल स्रोत और प्रसार की भी जांच कर सकती है।
पीड़िता के आरोपों के सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि जांच में महिला द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं पुलिस पर लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र जांच जरूरी होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने किस तरह की कार्रवाई की।
फिलहाल इस मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी आरोपी को दोषी साबित होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले ने एक बार फिर यौन अपराधों की शिकायतों में पीड़ितों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

