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36 लाख के कर्ज ने बनाया किडनैपिंग का प्लान: आरोपी ने AI से जुटाई लॉरेंस बिश्नोई गैंग की जानकारी, फिर सराफा कारोबारी के बेटे को बनाया निशाना

36 लाख के कर्ज ने बनाया किडनैपिंग का प्लान: आरोपी ने AI से जुटाई लॉरेंस बिश्नोई गैंग की जानकारी, फिर सराफा कारोबारी के बेटे को बनाया निशाना

एक चौंकाने वाले मामले में आरोपी ने खुलासा किया है कि 36 लाख रुपए के कर्ज से परेशान होकर उसने सराफा कारोबारी के बेटे के अपहरण की साजिश रची थी। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने फिरौती वसूलने के लिए किडनैपिंग का प्लान बनाया और इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपराध करने के तरीकों की जानकारी जुटाई।

आरोपी के मुताबिक, वह भारी कर्ज में डूबा हुआ था। उस पर करीब 36 लाख रुपए की देनदारी थी। कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नजर नहीं आने पर उसने अपराध का रास्ता चुना। उसने योजना बनाई कि किसी बड़े कारोबारी के बेटे का अपहरण कर फिरौती की मांग की जाएगी, जिससे वह अपनी आर्थिक परेशानी दूर कर सके।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने सराफा कारोबारी के बेटे वैभव को निशाना बनाया। उसने अपहरण की वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी तैयारी की थी। आरोपी ने बताया कि उसने इंटरनेट और AI टूल्स के जरिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग के काम करने के तरीकों के बारे में जानकारी जुटाई। उसने गैंग की गतिविधियों, धमकी देने के तरीके और फिरौती मांगने के पैटर्न को समझने की कोशिश की।

पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि उसने अपराध को अंजाम देने के लिए बाकायदा प्लान तैयार किया था। वह जानना चाहता था कि बड़े गैंग किस तरह से अपहरण और फिरौती के मामलों को अंजाम देते हैं। इसी जानकारी के आधार पर उसने अपनी रणनीति बनाने की कोशिश की।

हालांकि, पुलिस की सक्रियता के कारण उसकी साजिश ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। जांच एजेंसियों ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और अब उससे पूरे मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस वारदात में उसके साथ कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने अपराध की योजना बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया, लेकिन कानून से बच नहीं सका। पुलिस अब उसके मोबाइल, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है, ताकि मामले से जुड़े सभी पहलुओं का खुलासा किया जा सके।

इस घटना ने यह भी दिखाया है कि अपराधी अब तकनीक का इस्तेमाल अपराध की योजना बनाने के लिए करने लगे हैं। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार ऐसे मामलों पर नजर रख रहे हैं, ताकि डिजिटल माध्यमों से होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

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