45 लाख गांठ वाली कालीन, डिजाइन में 50 जानवर छिपे: साड़ी के वेस्ट से बनी जयपुरी कालीन; भदोही एक्सपो में 56 देशों के खरीदार
उत्तर प्रदेश के भदोही में आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो में देशभर की अलग-अलग शैली और डिजाइन वाली कालीनें विदेशी खरीदारों का ध्यान खींच रही हैं। इनमें एक ऐसी खास कालीन भी चर्चा में है, जिसके डिजाइन में करीब 50 अलग-अलग जानवरों की आकृतियां छिपी होने का दावा किया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात इसकी बेहद बारीक बुनाई बताई जा रही है। कालीन को तैयार करने में करीब 45 लाख गांठें लगने की बात सामने आई है।
इस कालीन की खासियत सिर्फ इसका डिजाइन ही नहीं है। दावा है कि इसे साड़ियों के वेस्ट यानी बची हुई सामग्री से तैयार किया गया है। जयपुरी शैली की इस कालीन में पारंपरिक भारतीय डिजाइन और आधुनिक सोच का मेल देखने को मिलता है। यही वजह है कि एक्सपो में आने वाले खरीदार और कारोबारी इस तरह के नए प्रयोगों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
डिजाइन में छिपे हैं 50 जानवर
कालीन की सबसे आकर्षक विशेषता इसका पैटर्न है। दावा है कि बारीकी से देखने पर इसके डिजाइन में करीब 50 अलग-अलग जानवरों की आकृतियां नजर आती हैं। सामान्य तौर पर कालीनों में फूल-पत्तियों, ज्यामितीय आकृतियों और पारंपरिक मोटिफ का इस्तेमाल होता है, लेकिन जानवरों की आकृतियों को इस तरह छिपाकर तैयार करना इसे अलग बनाता है।
इतनी बारीक डिजाइन वाली कालीन को तैयार करने में कारीगरों की मेहनत और समय दोनों काफी लगते हैं। हाथ से बुनी कालीनों में प्रत्येक गांठ डिजाइन को आकार देने में अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि गांठों की संख्या बढ़ने के साथ कालीन की बुनाई और डिजाइन की बारीकी भी बढ़ती जाती है।
साड़ी के वेस्ट से तैयार करने का दावा
इस कालीन को लेकर सबसे दिलचस्प दावा यह है कि इसके निर्माण में साड़ियों से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। यानी जिस सामग्री को आमतौर पर बेकार समझकर अलग कर दिया जाता है, उसे डिजाइन और कारीगरी के जरिए सजावटी कालीन का रूप देने की कोशिश की गई है।
ऐसे प्रयोग पारंपरिक कालीन उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल और नए बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं। जयपुरी शैली की रंग-बिरंगी डिजाइन के साथ यह प्रयोग भारतीय हस्तशिल्प की विविधता को भी सामने रखता है।
भदोही में जुटे दुनिया भर के खरीदार
भदोही में 4 से 7 अक्टूबर तक इंडिया कारपेट एक्सपो 2026 का आयोजन किया गया। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद यानी CEPC के मुताबिक एक्सपो के लिए 56 देशों के करीब 400 विदेशी खरीदारों और कारोबारी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 300 कालीन निर्माता और निर्यातक भी इसमें शामिल होने वाले थे।
एक्सपो का उद्देश्य भारतीय कालीन उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना और विदेशी खरीदारों के साथ सीधे कारोबारी संपर्क बढ़ाना है। यहां भारतीय कंपनियां अपने नए डिजाइन, हाथ से बुनी कालीनें और फ्लोर कवरिंग प्रदर्शित कर रही हैं।
भदोही की कालीनों की दुनियाभर में पहचान
भदोही को लंबे समय से हाथ से बनी कालीनों के बड़े केंद्र के रूप में पहचान मिली हुई है। यहां की कालीनों में महीन बुनाई, पारंपरिक डिजाइन और कारीगरों की बारीकी खास मानी जाती है। फाइन क्वालिटी की कालीनों में एक इंच में सैकड़ों तक गांठें लगाने की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे में 45 लाख गांठों वाली कालीन और उसमें छिपे 50 जानवरों का डिजाइन कारीगरों की बारीक कारीगरी और नए प्रयोगों की ओर ध्यान खींचता है। एक्सपो में इस तरह के उत्पाद भारतीय कालीन उद्योग को पारंपरिक हुनर के साथ आधुनिक डिजाइन और टिकाऊ सामग्री की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश को भी दिखाते हैं।

