मंगलवार रात लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें दिल्ली से गोरखपुर जा रही स्लीपर कोच बस पलट गई। हादसे में गोरखपुर निवासी कृष्णा यादव के तीन माह के बेटे शुभ की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य यात्री घायल हो गए।
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बस का चालक झपकी आने के कारण वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और बस अचानक पलट गई। बस में सवार यात्री पूरी तरह से भयभीत हो गए और कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और आपातकालीन राहतकर्मियों को सूचित किया। घायलों को शिकोहाबाद के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश घायलों को छुट्टी दे दी गई। हालांकि कुछ यात्रियों का हल्का चोटिल और झटका लगना जारी रहा।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि मृतक शिशु का शव दुर्घटना स्थल से अस्पताल ले जाया गया और उन्होंने अत्यंत दुःख और सदमे का सामना किया। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि हादसे की पूरी जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसी हाई-स्पीड रोडों पर थकावट और झपकी आने से दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने वाहन चालकों को समय-समय पर ब्रेक लेना, नींद पूरी करना और सावधानी से वाहन चलाना जरूरी बताया।
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और बस चालक से पूछताछ की जा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चालक की थकान, नींद और वाहन की गति दुर्घटना के लिए जिम्मेदार थी या अन्य कोई कारण भी शामिल था।
स्थानीय यात्री और पड़ोसी लोगों ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर रात के समय तेज रफ्तार और थकान के कारण यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के हादसे हुए हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि सड़क सुरक्षा के उपाय और रात में निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
सड़क सुरक्षा और यात्री सुरक्षा के विशेषज्ञों ने भी इस हादसे को गंभीर चेतावनी माना है। उनका कहना है कि स्लीपर बसों में चालक की थकान और लंबे समय तक लगातार ड्राइविंग को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम लागू होने चाहिए।
इस प्रकार, फिरोजाबाद में लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुई यह दुर्घटना एक मासूम शिशु की मृत्यु और दर्जनों यात्रियों के घायल होने की वजह बनी। हादसे ने सड़क सुरक्षा और वाहन चालक सतर्कता की जरूरत को फिर से उजागर किया है।

