संभल में सांप के काटने से 2 साल के मासूम की मौत, एंटी-वेनम से किया इनकार; 20 घंटे तक भटकते रहे परिजन
उत्तर प्रदेश के संभल में अंधविश्वास के चलते इलाज में हुई देरी ने एक मासूम की जान ले ली। यहां सांप के काटने से दो साल के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने सरकारी अस्पताल में बच्चे को एंटी-वेनम इंजेक्शन लगवाने से इनकार कर दिया। इसके बाद वे करीब 20 घंटे तक बच्चे के इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार नहीं मिलने के कारण बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई। आखिरकार उसकी मौत हो गई।
सांप के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे थे
बताया जा रहा है कि दो साल के बच्चे को सांप ने काट लिया था। इसके बाद परिजन उसे लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति को देखते हुए एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाने की सलाह दी।
हालांकि, परिजनों ने कथित तौर पर इंजेक्शन लगवाने से इनकार कर दिया। इसके बाद वे बच्चे को लेकर दूसरे स्थानों पर इलाज की तलाश में भटकते रहे।
करीब 20 घंटे तक इलाज के लिए भटकते रहे
परिजन बच्चे को अस्पताल के बजाय कथित तौर पर झाड़-फूंक और अन्य पारंपरिक उपायों के लिए अलग-अलग जगह ले गए। इस दौरान करीब 20 घंटे का समय बीत गया।
जहरीले सांप के काटने के बाद इलाज में इतनी देरी बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुई। उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंत में उसने दम तोड़ दिया।
एंटी-वेनम से बच सकती थी जान?
सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सा उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टरों के अनुसार, जहरीले सांप के काटने की स्थिति में अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय जांच और जरूरत पड़ने पर एंटी-वेनम उपचार लेना चाहिए।
अंधविश्वास के चलते इलाज में देरी स्थिति को गंभीर बना सकती है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश को लेकर जागरूकता की जरूरत सामने ला दी है।
अंधविश्वास से बचने की अपील
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों से अपील करते हैं कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचें। मरीज को अनावश्यक रूप से चलाने-फिराने और इलाज में देरी करने से बचना चाहिए।

