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प्रतापगढ़ : गेहूं बेचने के दस दिन बाद भी नहीं आया खाते में पैसा

किसानों से गेहूं खरीद के लिए जगह जगह बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भी उनके भुगतान अभी तक नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में किसान अपने भुगतान के लिए इधर उधर भटकने को मजबूर हैं। किसानों के गेहूं बिक्री का भुगतान ना मिल पाने से सरकार का 72 घंटे के
प्रतापगढ़ : गेहूं बेचने के दस दिन बाद भी नहीं आया खाते में पैसा

किसानों से गेहूं खरीद के लिए जगह जगह बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भी उनके भुगतान अभी तक नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में किसान अपने भुगतान के लिए इधर उधर भटकने को मजबूर हैं। किसानों के गेहूं बिक्री का भुगतान ना मिल पाने से सरकार का 72 घंटे के भीतर भुगतान करने का दावा भी हवा हवाई साबित हो रहा है।

रानीगंज प्रतिनिधि के अनुसार सरकार ने गेहूं खरीद क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद किसानों के खाते में 72 घंटे के भीतर पैसा किसानों के खाते में भेजने का दावा किया है, लेकिन यहां तो किसानों को गेहूं विक्रय किए आठ से दस दिन हो गए,लेकिन उनके खाते में अभी तक पैसा नहीं पहुंचा। वह क्रय केंद्रों का चक्कर काट रहे हैं । उन्हें आज कल खाते में पैसा चले जाने की बात बताई जा रही है। रानीगंज शिवगढ़ विपणन गेहूं खरीद क्रय केंद्र पर इस बार 250 किसानों से 88 सौ आठ कुंतल गेहूं की खरीद 15 जून तक हुई है। उसके बाद से यहां गेहूं खरीद बंद है। 250 किसानों में से 230 किसानों के खाते में पैसा चला गया है, अभी 20 किसानों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा है। देवगढ़ कमासिन प्रीतम तिवारीपुर गांव निवासी देवी प्रसाद तिवारी ने 11 जून को 42 कुंतल गेहूं शिवगढ़ विपणन खरीद केंद्र पर बेचा है, लेकिन अभी तक पैसा नहीं आया। इसी तरह हुसैनपुर के शिवब्रत नारायन, पूरेभागी के विजय बहादुर, सवैया की साबिरा बेगम, देवगढ़ कमासिन प्रीतम तिवारीपुर के विनोद त्रिपाठी सहित 20 किसानों को गेहूं विक्रय किए आठ से 10 दिन हो गए, लेकिन खाते में पैसा नही आया। खरीद बंद होने से शिवगढ़ विपणन गेहूं खरीद क्रय केंद्र पर खरीद कर रखा गया गेहूं भले ही पालीथीन से ढका गया है, लेकिन नीचे से पानी जाने पर गेहूं की बोरी भीग रही है। एमआइ जितेंद्र सिंह का कहना है कि 250 किसानों से 8808 कुंतल 50 किग्रा गेहूं खरीदा गया है। 20 किसानों के खाते में पैसा अभी नही पहुंचा है, जल्द आ जाएगा। रही बात खरीद की तो लिखित कोई आदेश नहीं आया है।

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