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ईंधन बचत की अपील के बीच 60 गाड़ियों और हेलीकॉप्टर से निरीक्षण, तेलंगाना मंत्रियों के काफिले पर उठे सवाल

ईंधन बचत की अपील के बीच 60 गाड़ियों और हेलीकॉप्टर से निरीक्षण, तेलंगाना मंत्रियों के काफिले पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील के बीच तेलंगाना सरकार के कुछ मंत्रियों के एक बड़े काफिले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नलगोंडा जिले में धान खरीद केंद्रों के निरीक्षण के दौरान मंत्रियों के काफिले में करीब 60 गाड़ियां और एक हेलीकॉप्टर शामिल होने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसकी तीखी आलोचना शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के मंत्री धान खरीद व्यवस्था और केंद्रों की स्थिति का जायजा लेने के लिए नलगोंडा पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए भारी काफिला मौजूद रहा। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में वाहनों और हेलीकॉप्टर के उपयोग को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

आलोचकों का कहना है कि एक तरफ केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री लगातार ईंधन की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह का भव्य और संसाधन-खपत वाला दौरा उन प्रयासों के विपरीत संदेश देता है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है, जहां कई यूजर्स ने इसे “अनावश्यक तामझाम” करार दिया है।

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि केवल निरीक्षण ही करना था तो कम संसाधनों में भी काम चल सकता था। इतने बड़े काफिले और हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को उन्होंने “जनता के पैसे की बर्बादी” बताया है।

वहीं, सरकार की ओर से इस पर सफाई देते हुए कहा गया है कि मंत्री स्तर के दौरे में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के चलते काफिला बड़ा होता है। अधिकारियों के अनुसार, धान खरीद केंद्रों का निरीक्षण एक महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम था, जिसमें अलग-अलग जिलों से अधिकारी और सुरक्षा कर्मी भी शामिल थे।

इसके बावजूद, यह मामला अब राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है और सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे दिखावे की राजनीति बता रहे हैं, तो कुछ इसे सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में संतुलन जरूरी है, ताकि एक तरफ प्रशासनिक जरूरतें पूरी हों और दूसरी तरफ जनता को गलत संदेश भी न जाए। खासकर तब, जब देशभर में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा हो।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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