वीडियो! रजनीकांत बोले- विजय 25 साल छोटा लेकिन कोई जलन नहीं, स्टालिन से दोस्ती राजनीति से ऊपर
साउथ सुपरस्टार Rajinikanth ने तमिलनाडु की राजनीति को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। चेन्नई स्थित अपने पोएस गार्डन आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए रजनीकांत ने साफ कहा कि उन्हें अभिनेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने Vijay से किसी तरह की जलन नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin के साथ उनकी दोस्ती को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
रजनीकांत ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके बारे में कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही थीं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि विजय के राजनीति में तेजी से उभरने और मुख्यमंत्री बनने से रजनीकांत नाराज हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि विजय की सफलता उनकी मेहनत और जनता के समर्थन का परिणाम है और उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है।
सुपरस्टार ने एम.के. स्टालिन के साथ अपनी मुलाकात को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि स्टालिन के साथ उनकी दोस्ती करीब चार दशक पुरानी है और यह रिश्ता राजनीति से कहीं ऊपर है। रजनीकांत ने कहा कि किसी दोस्त से मिलना या हालचाल पूछना राजनीतिक एजेंडा नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अफवाहों पर समय रहते जवाब न दिया जाए तो लोग उन्हें सच मानने लगते हैं। इसी वजह से उन्होंने मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखने का फैसला किया। रजनीकांत ने जोर देकर कहा कि वे किसी भी तरह की “सस्ती राजनीति” में विश्वास नहीं करते और न ही किसी के खिलाफ साजिश का हिस्सा हैं।
तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों काफी दिलचस्प मोड़ पर है। विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने हालिया विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाई है। विजय ने हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और विधानसभा में विश्वास मत भी हासिल कर लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रजनीकांत का यह बयान तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है। लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े बड़े सितारों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। हालांकि रजनीकांत ने साफ कर दिया कि व्यक्तिगत रिश्तों और राजनीति को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।
रजनीकांत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। उनके समर्थकों ने इसे “परिपक्व और संतुलित बयान” बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में इसे तमिलनाडु की बदलती राजनीति का अहम संकेत माना जा रहा है।

