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तमिलनाडु में सरकार बनाने को TVK को चाहिए 10 सीट, कौन देगा साथ? एक्टर विजय को मिलेगा पहला मौक

तमिलनाडु में सरकार बनाने को TVK को चाहिए 10 सीट, कौन देगा साथ? एक्टर विजय को मिलेगा पहला मौक

तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि किसी नई पार्टी को सरकार गठन की स्थिति में पहुंचना है, तो उसे लगभग 10 अहम सीटों पर जीत या समर्थन जुटाना निर्णायक साबित हो सकता है। इसी संदर्भ में अभिनेता Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।

TVK के लिए क्यों अहम हैं 10 सीटें?

तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में किसी नए राजनीतिक दल के लिए सीधे सत्ता तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर TVK को कम से कम 10 सीटों पर प्रभावी प्रदर्शन मिलता है, तो वह किसी भी गठबंधन की सत्ता बनाने में “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकती है।

विजय का राजनीतिक प्रवेश और उम्मीदें

अभिनेता विजय के राजनीति में आने के बाद राज्य में युवा वोट बैंक और सिनेमा फैन बेस को लेकर काफी चर्चा है। उनकी लोकप्रियता को TVK की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। यही कारण है कि राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या विजय अपने दम पर सीटें जीत पाएंगे या उन्हें गठबंधन का सहारा लेना पड़ेगा।

कौन दे सकता है समर्थन?

तमिलनाडु की राजनीति में समर्थन का समीकरण अक्सर चुनाव बाद बदलता रहा है। क्षेत्रीय दल, छोटे संगठन और निर्दलीय विधायक कई बार सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में TVK के लिए भी संभावना है कि चुनाव परिणामों के बाद वह किसी बड़े गठबंधन के साथ हाथ मिला सकती है।

हालांकि अभी किसी भी प्रमुख दल ने TVK को लेकर खुलकर समर्थन की घोषणा नहीं की है।

गठबंधन की राजनीति सबसे बड़ा फैक्टर

राज्य की राजनीति में गठबंधन हमेशा से निर्णायक रहा है। बड़े दलों के साथ छोटे दलों की साझेदारी कई बार सत्ता परिवर्तन का कारण बनी है। ऐसे में TVK का भविष्य भी इस बात पर निर्भर करेगा कि चुनाव बाद वह किन दलों के साथ रणनीतिक समझौता करती है।

विजय के लिए पहला राजनीतिक इम्तिहान

अगर विजय की पार्टी पहली बार चुनाव मैदान में उतरती है, तो यह उनके लिए बड़ा राजनीतिक परीक्षण होगा। लोकप्रियता को वोट में बदलना और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

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