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तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार: 23 मंत्रियों ने ली शपथ, वीडियो में जाने शपथ के दौरान नारेबाज़ी और राज्य गीत को लेकर उठा विवाद

तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार: 23 मंत्रियों ने ली शपथ, वीडियो में जाने शपथ के दौरान नारेबाज़ी और राज्य गीत को लेकर उठा विवाद

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार गुरुवार को हुआ, जिसमें कुल 23 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस विस्तार में राजनीतिक संतुलन और गठबंधन समीकरणों को साधने की कोशिश के तहत दो कांग्रेस विधायकों को भी कैबिनेट में जगह दी गई है। शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने सभी मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस विधायक राजेश कुमार ने शपथ लेते समय पारंपरिक शपथ शब्दों के बजाय राजनीतिक नारे लगाए। उन्होंने “कामराज अमर रहें”, “राजीव गांधी अमर रहें” और “जननायक राहुल गांधी जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। इस पर राज्यपाल ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उन्हें रोका और स्पष्ट किया कि शपथ केवल संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही ली जानी चाहिए और उसमें किसी प्रकार के नारे शामिल नहीं हो सकते।

राज्यपाल की इस टिप्पणी के बाद समारोह में कुछ समय के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई, हालांकि बाद में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और बाकी मंत्रियों की शपथ सामान्य रूप से पूरी कराई गई।दूसरा विवाद समारोह में राज्य गीत के प्रस्तुतीकरण को लेकर सामने आया। कार्यक्रम के अंत में तमिलनाडु का राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझ्थु’ बजाया गया, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं। परंपरागत रूप से पिछली सरकारों में यह राज्य गीत शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में बजाया जाता रहा है, जिससे इसे राज्य की सांस्कृतिक और प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक माना जाता है।

समारोह के दौरान गीत को अंत में बजाए जाने पर विपक्षी दलों ने इसे परंपरा से अलग कदम बताते हुए आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है और इसे लेकर स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम के प्रोटोकॉल में बदलाव प्रशासनिक कारणों से किया गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार जहां सरकार की स्थिरता और गठबंधन मजबूती का संकेत देता है, वहीं शपथ ग्रहण समारोह में हुए विवादों ने इसे राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना दिया है। खासकर कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी और शपथ के दौरान दिए गए नारों ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल सभी 23 मंत्रियों ने अपने पदभार ग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और नई सरकार से विकास और प्रशासनिक सुधारों की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

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