तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक सस्पेंस, वीडियो में जाने विजय के बहुमत दावे पर सवाल; शपथ समारोह टला
तमिलनाडु की राजनीति में इस समय बड़ा सस्पेंस बना हुआ है, जहां एक्टर से नेता बने Joseph Vijay की कथित सरकार गठन की कोशिशों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है और उनके मुख्यमंत्री बनने के दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।रिपोर्ट्स और राजनीतिक हलकों में सामने आई जानकारी के अनुसार, Joseph Vijay ने शुक्रवार को राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar से मुलाकात कर तीसरी बार सरकार बनाने का दावा पेश किया था। उनके साथ कथित तौर पर समर्थन पत्र भी सौंपा गया, जिसमें कुल 116 विधायकों के समर्थन का दावा किया गया।
बताया जा रहा है कि यह समर्थन Indian National Congress, CPI और CPI(M) के विधायकों से जुड़ा हुआ है। हालांकि, बहुमत के लिए आवश्यक संख्या अभी पूरी नहीं हो पा रही है, जिसके कारण राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है।सूत्रों के अनुसार, बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़ा अभी भी पूरा नहीं हुआ है क्योंकि IUML और VCK जैसे दलों ने अब तक औपचारिक समर्थन पत्र नहीं दिया है। इन दोनों दलों के पास मिलाकर लगभग 4 विधायक बताए जा रहे हैं। ऐसे में सरकार गठन के लिए जरूरी संख्या तक पहुंचने में अभी भी कुछ विधायकों की कमी बनी हुई है।
इसी राजनीतिक स्थिति के चलते आज प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, जब तक स्पष्ट बहुमत सिद्ध नहीं होता, तब तक राज्यपाल द्वारा सरकार गठन की अनुमति नहीं दी जा सकती।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि तमिलनाडु की मौजूदा स्थिति पूरी तरह से अस्थिर है और गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई दलों के समर्थन के दावों के बावजूद वास्तविक समर्थन संख्या को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिससे यह मामला और जटिल हो गया है।
उधर, विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार गठन को लेकर किए जा रहे दावे जल्दबाजी में किए गए हैं और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है। वहीं, समर्थक दलों का दावा है कि जल्द ही अतिरिक्त समर्थन जुटाकर बहुमत साबित कर दिया जाएगा।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में और विधायकों का समर्थन नहीं मिला तो यह प्रयास विफल भी हो सकता है। फिलहाल राज्य में सत्ता परिवर्तन को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और सभी की नजरें अगले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। स्थिति स्पष्ट होने तक तमिलनाडु की राजनीति में अस्थिरता और सस्पेंस बने रहने की संभावना है।

