बकरीद से पहले मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, तमिलनाडु में गाय और बछड़ों की कुर्बानी पर रोक
बकरीद से ठीक एक दिन पहले मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को बड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि राज्य में बकरीद या किसी भी अन्य अवसर पर गाय और बछड़ों की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी और आदेश के बाद कानूनी और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।यह निर्देश जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि भारतीय संविधान और देश की सांस्कृतिक परंपराओं में गाय का विशेष महत्व रहा है, इसलिए कानून के अनुसार गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संविधान सभा की बहस का भी जिक्र किया। बेंच ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने भी गाय को भारत की संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा माना था। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “गाय भारत में पूजनीय मानी जाती है और भगवान कृष्ण के समय से भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी रही है।”हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि इतिहास में कई मुस्लिम शासकों ने भी सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए गोहत्या पर रोक लगाई थी। अदालत ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी गो संरक्षण को बेहद महत्वपूर्ण मानते थे और इसे भारतीय समाज की नैतिक जिम्मेदारी समझते थे।
कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि राज्य में लागू पशु संरक्षण कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि गाय और बछड़ों की अवैध कुर्बानी न हो। अदालत ने प्रशासन को निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कई संगठनों ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है और इसे भारतीय संस्कृति और कानून के अनुरूप बताया है। वहीं कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर भी देख रहे हैं। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह निर्देश कानून और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर दिया गया है।
तमिलनाडु सरकार की ओर से फिलहाल इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि जिला प्रशासन और पुलिस को इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। बकरीद को देखते हुए राज्य में सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ाई जा सकती है।गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में पहले से ही गोहत्या को लेकर अलग-अलग कानून लागू हैं। कुछ राज्यों में गाय की हत्या पूरी तरह प्रतिबंधित है, जबकि कुछ राज्यों में सीमित अनुमति के प्रावधान हैं। ऐसे में मद्रास हाईकोर्ट का यह आदेश एक बार फिर गो संरक्षण और धार्मिक परंपराओं को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर सकता है। फिलहाल बकरीद से पहले आए इस फैसले पर पूरे देश की नजर बनी हुई है और यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा का विषय बन सकता है।

