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तमिलनाडु चुनाव में बड़ा उलटफेर: टीवीके की जबरदस्त बढ़त, वीडियो में जाने सीएम एमके स्टालिन की हार, बहुमत की रेस में नई सियासी तस्वीर

तमिलनाडु चुनाव में बड़ा उलटफेर: टीवीके की जबरदस्त बढ़त, वीडियो में जाने सीएम एमके स्टालिन की हार, बहुमत की रेस में नई सियासी तस्वीर

असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की विधानसभा सीटों पर वोटों की गिनती जारी है और शुरुआती रुझानों ने कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर तमिलनाडु में देखने को मिल रहा है, जहां दो साल पहले बनी नई पार्टी टीवीके (TVK) ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

ताजा रुझानों के मुताबिक टीवीके ने अब तक 30 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि 77 सीटों पर वह आगे चल रही है। इस तरह पार्टी राज्य में सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरती दिख रही है। तमिलनाडु में कुल बहुमत का आंकड़ा 118 सीटों का है, और टीवीके उस दिशा में तेजी से बढ़ती नजर आ रही है।

सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कोलाथुर सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें टीवीके उम्मीदवार बीएस बाबू ने 8000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया है। बीएस बाबू पहले डीएमके (DMK) में थे और बाद में उन्होंने फरवरी 2026 में विजय की पार्टी टीवीके जॉइन की थी। उनकी यह जीत चुनावी विश्लेषकों के लिए भी बड़े आश्चर्य के रूप में सामने आई है।

इस परिणाम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां लंबे समय से सत्ता में रही डीएमके को बड़ा झटका लगा है और टीवीके ने खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर लिया है।

इधर टीवीके की बढ़त के बीच पार्टी के नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक्टर विजय के पिता चंद्रशेखर ने संकेत दिया है कि भविष्य में टीवीके कांग्रेस के साथ गठबंधन कर सकती है। इस बयान ने राज्य की संभावित गठबंधन राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।

यदि टीवीके बहुमत के आंकड़े तक पहुंचती है, तो तमिलनाडु की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा, क्योंकि एक नई पार्टी का इतने कम समय में सत्ता की दौड़ में आगे निकलना राज्य की राजनीतिक परंपरा को चुनौती देता है।

वहीं असम, केरल और पुडुचेरी में भी मतगणना जारी है, लेकिन फिलहाल तमिलनाडु के नतीजों पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर और भी बदल सकती है, लेकिन शुरुआती रुझान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि इस बार दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

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