सवर्ण समाज ने यूजीसी अधिनियम के विरोध में एकजुटता का प्रदर्शन किया और शंखनाद कर चेतावनी दी। ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत संगठनों ने मिलकर हुंकार भरी और कहा कि अगर बदलावों को लेकर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगामी समय में विधानसभा घेराव जैसे बड़े आंदोलन किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यदि सवर्ण वर्ग के लोग मतदान के दिन घर से बाहर नहीं निकते हैं, तो इसका राजनीतिक प्रभाव बहुत बड़ा होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि समाज की मांगों को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम ला सकता है।
ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत संगठनों के नेताओं ने मंच से स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल यूजीसी अधिनियम तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े सभी निर्णयों पर उनका ध्यान रहेगा। उन्होंने कहा कि कानून और नीतियों में समाज के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस मौके पर कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज अपनी एकजुटता दिखाने के लिए लगातार सतर्क है और जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन करने में पीछे नहीं हटेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूजीसी अधिनियम के विरोध में यह पहली बार नहीं है कि सवर्ण समाज ने इतनी स्पष्ट चेतावनी दी है। सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में ऐसे आंदोलन अक्सर तब होते हैं जब वर्ग विशेष की मांगें नजरअंदाज की जाती हैं।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस आंदोलन पर नजर रखते हुए सुरक्षा और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पात को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
वक्ताओं ने मंच से कहा कि सवर्ण समाज केवल अधिकारों की रक्षा करना चाहता है और उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा। लेकिन चेतावनी भी स्पष्ट थी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन का स्वरूप और तेज हो सकता है।
सवर्ण समाज के नेताओं ने यह भी कहा कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के मामले में उनके हितों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से अनुरोध किया कि यूजीसी अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए जाएं ताकि समाज के सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
इस तरह के कार्यक्रम और चेतावनी यह दर्शाते हैं कि समाज की एकजुटता और राजनीतिक चेतना अब और अधिक स्पष्ट हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में सरकार को ऐसे सामाजिक दबावों को नजरअंदाज करना कठिन होगा।

