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वैशाख पूर्णिमा पर डेजर्ट डिवीजन में वन्यजीव गणना, वाटर हॉल पद्धति से हुई निगरानी

वैशाख पूर्णिमा पर डेजर्ट डिवीजन में वन्यजीव गणना, वाटर हॉल पद्धति से हुई निगरानी

वन्यजीव संरक्षण और उनकी संख्या के आकलन के उद्देश्य से वन मण्डल डेजर्ट डिवीजन परियोजना क्षेत्र में इस वर्ष भी वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर वन्यजीव गणना सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस गणना के दौरान “वाटर हॉल पद्धति” का उपयोग किया गया, जिसके तहत वन्यजीवों की गतिविधियों को उनके जल स्रोतों पर आने-जाने के आधार पर रिकॉर्ड किया जाता है।

Desert Forest Division Rajasthan के अधिकारियों और वनकर्मियों की टीम ने इस विशेष अभियान में भाग लिया। गणना के दौरान विभिन्न जल स्रोतों, तालाबों और वाटर होल्स पर निगरानी रखी गई, जहां अलग-अलग प्रजातियों के वन्यजीवों की उपस्थिति दर्ज की गई।

इस पद्धति के तहत रात और दिन दोनों समय निगरानी की गई ताकि किसी भी वन्यजीव की गतिविधि छूट न सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका रेगिस्तानी क्षेत्रों में वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति का अनुमान लगाने में काफी उपयोगी साबित होता है, क्योंकि यहां पानी के स्रोत सीमित होते हैं और जानवर नियमित रूप से उन्हीं स्थानों पर आते हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस गणना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पाए जाने वाले वन्यजीवों की संख्या, उनकी प्रजातियों और उनके आवासीय व्यवहार को समझना है। इससे भविष्य में संरक्षण योजनाएं बनाने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाने वाले प्रमुख वन्यजीव जैसे चिंकारा, नीलगाय, लोमड़ी, जंगली सूअर और विभिन्न पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति इस गणना में दर्ज की गई। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष कई क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधि स्थिर या थोड़ी बढ़ी हुई देखी गई है।

वन विभाग ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप को देखते हुए ऐसी गणनाएं बेहद जरूरी हो गई हैं, ताकि वन्यजीवों की स्थिति पर नियमित नजर रखी जा सके।

इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने भी सहयोग किया। लोगों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया और उन्हें प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।

कुल मिलाकर, वैशाख पूर्णिमा पर आयोजित यह वन्यजीव गणना न केवल क्षेत्र की जैव विविधता का आकलन करने में सहायक रही, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुई।

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