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मंडी में फसल नहीं बिकी तो किसान ने बदली राह, अब 15 देशों तक पहुंचा किनोवा कारोबार

मंडी में फसल नहीं बिकी तो किसान ने बदली राह, अब 15 देशों तक पहुंचा किनोवा कारोबार

मंडी में फसल नहीं बिकने से आर्थिक संकट में घिरे एक किसान ने हार मानने के बजाय संघर्ष को अवसर में बदल दिया। सायला उपखंड के बावतरा गांव निवासी किसान प्रेम प्रकाश राजपुरोहित ने खेती में नवाचार करते हुए किनोवा की ऐसी श्रृंखला तैयार की, जो आज भारत सहित 15 देशों तक पहुंच चुकी है। उनका यह प्रयोग अब एक सफल अंतरराष्ट्रीय बिजनेस मॉडल बन गया है।

प्रेम प्रकाश राजपुरोहित ने बताया कि पारंपरिक फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से वे लगातार आर्थिक दबाव में आ गए थे। मंडियों में लागत भी नहीं निकल पा रही थी। ऐसे में उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी। इसी दौरान उन्हें किनोवा जैसी पोषक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग वाली फसल के बारे में जानकारी मिली।

प्रयोग से व्यवसाय तक का सफर

शुरुआत में सीमित जमीन पर प्रयोग के तौर पर किनोवा की खेती की गई। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप तकनीक विकसित करने में चुनौतियां आईं, लेकिन निरंतर प्रयासों से उत्पादन सफल रहा। धीरे-धीरे उन्होंने केवल खेती तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया।

इसके बाद उन्होंने किनोवा आधारित उत्पादों की एक पूरी श्रृंखला तैयार की। गुणवत्ता और पोषण को प्राथमिकता देते हुए उत्पादों को बाजार में उतारा गया। देखते ही देखते उनकी पहचान एक नवाचारी किसान-उद्यमी के रूप में बनने लगी।

15 देशों तक पहुंचा कारोबार

आज प्रेम प्रकाश राजपुरोहित का किनोवा कारोबार भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ 15 देशों तक पहुंच चुका है। उनके उद्यम का सालाना टर्नओवर 20 करोड़ रुपए से अधिक बताया जा रहा है, जबकि उनकी व्यक्तिगत आय 25 से 30 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

उनका कहना है कि सही फसल चयन, आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग को समझकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। उन्होंने अन्य किसानों को भी पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर वैकल्पिक और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर ध्यान देने की सलाह दी है।

किसानों के लिए प्रेरणा

स्थानीय स्तर पर उनका यह मॉडल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है। कई किसान अब उनसे जुड़कर किनोवा की खेती और प्रोसेसिंग से लाभ कमा रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को बाजार से सीधा जोड़कर मूल्य संवर्धन की दिशा में प्रोत्साहित किया जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं रहेगी।

सायला के बावतरा गांव से शुरू हुआ यह सफर आज एक मिसाल बन चुका है। प्रेम प्रकाश राजपुरोहित ने साबित कर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी नवाचार और दृढ़ संकल्प से सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है।

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