Samachar Nama
×

3 मिनट की वायरल डॉक्यूमेंट्री में देखें ‘छप्पनिया अकाल’ का भयावह दौर, जिसे याद कर आज भी कांप उठते हैं लोग

3 मिनट की वायरल डॉक्यूमेंट्री में देखें ‘छप्पनिया अकाल’ का भयावह दौर, जिसे याद कर आज भी कांप उठते हैं लोग

छप्पनिया अकाल पर आधारित एक 3 मिनट की डॉक्यूमेंट्री इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस छोटी लेकिन बेहद मार्मिक फिल्म में उस भयावह दौर को दिखाया गया है, जब राजस्थान और थार मरुस्थल भुखमरी, सूखे और मौत की त्रासदी से गुजर रहे थे। डॉक्यूमेंट्री को देखने के बाद लोग भावुक हो रहे हैं और इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय को याद कर सिहर उठे हैं।

वीडियो में वर्ष 1898-99 के उस भीषण अकाल की तस्वीर पेश की गई है, जिसे दुनिया “द ग्रेट इंडियन फैमिन 1899” और राजस्थान में “छप्पनिया अकाल” के नाम से जानती है। विक्रम संवत 1956 में पड़े इस अकाल ने लाखों लोगों की जिंदगी छीन ली थी। लगातार सूखा पड़ने से खेत बंजर हो गए, जल स्रोत सूख गए और लोगों के सामने भूख से मरने की नौबत आ गई।

डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि किस तरह लोग भोजन की तलाश में गांव छोड़कर पलायन करने को मजबूर हो गए थे। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को भूख और बीमारी के कारण खो दिया। उस दौर में लोग पेड़ों की छाल, जंगली घास और सूखे बीज खाकर जीवन बचाने की कोशिश कर रहे थे।

वीडियो में पुराने दस्तावेजों, लोककथाओं और ऐतिहासिक तथ्यों के जरिए यह भी बताया गया है कि अकाल ने केवल इंसानों ही नहीं, बल्कि पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी पूरी तरह तबाह कर दिया था। राजस्थान के कई इलाकों में गांव वीरान हो गए थे और हजारों लोग पलायन कर गए थे।

डॉक्यूमेंट्री के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसे राजस्थान के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यह वीडियो नई पीढ़ी को इतिहास की उस सच्चाई से रूबरू कराता है, जिसे केवल किताबों में पढ़ना काफी नहीं है।

इतिहासकारों के अनुसार “छप्पनिया अकाल” केवल प्राकृतिक आपदा नहीं था, बल्कि मानव संघर्ष और जीवटता की सबसे कठिन परीक्षा भी था। कुछ इतिहासवेत्ताओं का मानना है कि इस अकाल में लाखों लोगों की जान गई और इसका असर कई वर्षों तक राजस्थान की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर बना रहा।

यह वायरल डॉक्यूमेंट्री आज की पीढ़ी को यह भी याद दिलाती है कि पानी, अनाज और प्राकृतिक संसाधनों का महत्व कितना बड़ा है। राजस्थान की लोकस्मृतियों में आज भी “छप्पनिया अकाल” का दर्द जीवित है और लोग इसे इतिहास के सबसे भयावह दौरों में से एक मानते हैं।

Share this story

Tags