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अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध का असर: हाड़ौती क्षेत्र की बासमती चावल इंडस्ट्री ठप, किसानों और व्यापारियों के सामने संकट

अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध का असर: हाड़ौती क्षेत्र की बासमती चावल इंडस्ट्री ठप, किसानों और व्यापारियों के सामने संकट

दुनिया की दो बड़ी भू-राजनीतिक ताकतों अमेरिका और इजराइल के बीच 28 फरवरी को ईरान पर शुरू हुए युद्ध का असर हजारों किलोमीटर दूर राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में साफ दिखाई दे रहा है। बूंदी, कोटा और बारां जिलों की बासमती चावल इंडस्ट्री पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यवधान ने भारी प्रभाव डाला है।

सूत्रों के अनुसार, हाड़ौती क्षेत्र से रोजाना लगभग 50 करोड़ रुपए का बासमती चावल खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता था। लेकिन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ गई है और निर्यात लगभग ठप हो गया है। इस वजह से राइस मिलों के गोदामों में चावल का स्टॉक लगातार बढ़ रहा है और व्यापारियों को मजबूरी में सस्ते दाम पर चावल बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

व्यापारियों ने बताया कि इस संकट के कारण हर किस्म के चावल के भाव 700 से 800 रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं, जो पिछले समय के मुकाबले काफी कम है। इससे न केवल व्यापारियों के मुनाफे पर असर पड़ा है, बल्कि किसानों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि उन्होंने साल भर मेहनत और निवेश से चावल की पैदावार तैयार की थी। लेकिन निर्यात में ठहराव और दाम गिरने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। कई किसान ऋण और कर्ज के बोझ तले दब गए हैं और उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन से तत्काल राहत की जरूरत है।

राइस मिल संचालकों ने भी कहा कि उनके गोदाम भर गए हैं और वे नए चावल खरीदने या उत्पादन बढ़ाने में असमर्थ हैं। उन्होंने चेताया कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात जल्दी नहीं सुधरते, तो हाड़ौती की बासमती चावल इंडस्ट्री लंबे समय तक प्रभावित रहेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भरता का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने सुझाव दिया कि व्यापारियों और किसानों के लिए स्थानीय बाजार और आंतरिक वितरण नेटवर्क को मजबूत किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति स्थिर रह सके।

स्थानीय प्रशासन ने भी उद्योगपतियों और किसानों से मुलाकात की है और अंतरराष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए संभावित राहत और समर्थन उपायों पर विचार करने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार इस संकट से प्रभावित किसानों और व्यापारियों को मदद पहुंचाने के लिए आर्थिक पैकेज और समर्थन योजनाओं पर विचार कर रही है।

अंततः, अमेरिका और इजराइल-ईरान युद्ध का असर हाड़ौती क्षेत्र की बासमती चावल इंडस्ट्री पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। निर्यात ठप होने और कीमतें गिरने से किसानों और व्यापारियों दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रशासन और राज्य सरकार की तेजी से उठाई गई कदम ही इस संकट का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती है।

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