अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष: छठा दिन, वीडियो में देंखे अमेरिकी संसद ने ट्रम्प के खिलाफ प्रस्ताव को खारिज किया
अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान पर संघर्ष का आज छठा दिन है। इस दौरान अमेरिकी हमलों की गति और पैमाना लगातार बढ़ता जा रहा है, और अब तक ईरान में होने वाले विनाशकारी हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अमेरिकी हमलों के 100 घंटे पूरे हो चुके हैं और हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।
बुधवार को अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर रोक लगाने का एक प्रस्ताव पेश किया गया था। यह प्रस्ताव कांग्रेस के उन सदस्यों द्वारा समर्थित था जो चाहते थे कि राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के ईरान पर आगे कोई हमला न करें। लेकिन मतदान में यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका। इसके पक्ष में 47 सांसदों ने और विरोध में 53 सांसदों ने वोट दिया। चूंकि जरूरी बहुमत हासिल नहीं हुआ, इसलिए यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। इसका अर्थ है कि राष्ट्रपति ट्रम्प के पास ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने का अधिकार है और अमेरिकी फौजों द्वारा किए जा रहे हमले फिलहाल रुकने की संभावना नहीं है।
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की रणनीति बेहद आक्रामक रही है। अब तक अमेरिका और इजराइल ने ईरान में लगभग 5,000 बम गिराए हैं और 20 ईरानी युद्धपोत डुबो दिए हैं। इन हमलों में 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बल भी शामिल हैं। हमलों ने ईरान के कई बड़े शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है, जिससे वहां के बुनियादी ढांचे और नागरिक जीवन पर गहरा असर पड़ा है।
ईरान ने भी अमेरिकी हमलों का जवाब देते हुए मिडिल ईस्ट के नौ देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इस पलटवार ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है कि ईरान अपने क्षेत्र और सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाएगा। इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संघर्ष केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य पूर्व के अन्य देशों में भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी संसद में प्रस्ताव के खारिज होने के बाद ट्रम्प प्रशासन को राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अमेरिका और इजराइल के इस आक्रामक रुख की निंदा की है और संघर्ष को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की अपील की है। वहीं, ईरान ने अपने तेवर तेज कर दिए हैं और यह संकेत दिया है कि वह अपने क्षेत्रीय हितों और सुरक्षा को लेकर समझौता नहीं करेगा।
छह दिन के इस संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव की लहर पैदा कर दी है। आम नागरिकों की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों पर इसके गंभीर असर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस संघर्ष को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया तो यह वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक संकट का रूप ले सकता है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच यह तनाव भविष्य में किस दिशा में जाएगा, इसे लेकर वैश्विक समुदाय चिंता में है। फिलहाल, संघर्ष का यह दौर जारी है और दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं, क्योंकि हर नए हमले के साथ स्थिति और जटिल होती जा रही है।

