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डिलीवरी के बाद महिला की मौत से बवाल, वीडियो में जाने अजीतगढ़ अस्पताल में परिजनों का हंगामा; 20 घंटे बाद मांगें मानने पर खत्म हुआ धरना

डिलीवरी के बाद महिला की मौत से बवाल, वीडियो में जाने अजीतगढ़ अस्पताल में परिजनों का हंगामा; 20 घंटे बाद मांगें मानने पर खत्म हुआ धरना

जिले के अजीतगढ़ उपजिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना 17 अगस्त की बताई जा रही है। महिला की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया और अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए। करीब 20 घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से मांगें मानने का आश्वासन दिए जाने पर ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया। मामले को लेकर 18 अगस्त की दोपहर आक्रोशित महिलाएं अस्पताल परिसर के अंदर पहुंच गईं। उन्होंने डॉक्टर के कार्यालय में जाने की कोशिश की, लेकिन मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया। स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की।

डिलीवरी में देरी का परिजनों का आरोप

मृतका के पति ने बताया कि उनकी पत्नी को डिलीवरी के लिए अजीतगढ़ उपजिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों के अनुसार दोपहर 2 बजे तक डिलीवरी नहीं हुई तो डॉक्टर ने कहा कि शाम 5 से 6 बजे तक डिलीवरी हो सकती है।परिजनों का दावा है कि शाम 6 बजकर 23 मिनट पर महिला ने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद प्रसूता को अचानक तेज ब्लीडिंग होने लगी। परिजनों के मुताबिक महिला का काफी खून बह रहा था।परिजनों ने आरोप लगाया कि इस दौरान डॉक्टर ने कमरे में मौजूद उनकी दोनों बहनों को बाहर निकाल दिया। कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर आए और बताया कि वह महिला का इलाज कर रहे हैं।

जयपुर ले जाने की दी सलाह

परिजनों के अनुसार शाम करीब 7 बजकर 13 मिनट पर डॉक्टर ने मरीज को जयपुर के जनाना अस्पताल ले जाने के लिए कहा। उस समय महिला बेहोश हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि जब मरीज को एंबुलेंस में ले जाया गया तो उसे पर्याप्त प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया गया और एंबुलेंस में ड्रिप भी नहीं लगाई गई।परिजनों के मुताबिक एंबुलेंस सामोद के पास पहुंची तो डॉक्टर का एंबुलेंस में मौजूद नर्सिंग स्टाफ के पास फोन आया। इसके बाद मरीज को बराला स्थित अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद महिला को मृत घोषित कर दिया।

पति ने बताया- पूरी एंबुलेंस खून से सन गई

मृतका के पति ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी का इतना अधिक खून बहा कि पूरी एंबुलेंस खून से सन गई। उनका कहना है कि अस्पताल में करीब 45 मिनट तक महिला की ब्लीडिंग होती रही। परिवार ने आरोप लगाया कि समय पर उचित इलाज और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिलने पर महिला की जान बचाई जा सकती थी।हालांकि महिला की मौत के वास्तविक कारण और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर की समझाइश

धरने और हंगामे की सूचना मिलने पर श्रीमाधोपुर एसडीएम सौरभ भांबू मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर उनकी मांगें सुनीं। प्रशासन की ओर से मांगें मानने का आश्वासन दिए जाने के बाद करीब 20 घंटे से चल रहा धरना समाप्त कर दिया गया।फिलहाल मामले में प्रशासन और चिकित्सा विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है। परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और महिला को दिए गए उपचार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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