राजस्थान विधानसभा में हंगामा: कोविड वैक्सीन और हृदयाघात को लेकर भ्रम पर मांगा स्पष्टीकरण
राजस्थान विधानसभा में बुधवार को कोविड-19 वैक्सीन के बाद हृदयाघात के मामलों में वृद्धि होने के कथित भ्रम को लेकर हंगामा मच गया। विपक्षी विधायक और कुछ सदस्यों ने सरकार से इस मामले में स्पष्ट स्पष्टीकरण की मांग की, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए ठप्प हो गई।
विपक्षी दलों का आरोप था कि सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि कोविड-19 की एक विशेष वैक्सीन के बाद हृदयाघात के मामलों में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जनता और मरीजों में डर और असुरक्षा पैदा हो रही है। इसलिए सरकार को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और तथ्यात्मक जानकारी साझा करनी चाहिए।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में बयान देते हुए कहा कि वैक्सीन और हृदयाघात के बीच कोई वैज्ञानिक और पुष्ट प्रमाण नहीं है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कोविड-19 वैक्सीन सुरक्षित है और इसका हृदयाघात जैसी बीमारियों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नियमित रूप से स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चला रही है और लोगों को भ्रम से बचाने के लिए जानकारी उपलब्ध करा रही है।
सदन में हंगामा तब बढ़ गया जब कुछ सदस्यों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार की ओर से पर्याप्त सूचना और सार्वजनिक संवाद नहीं किया गया। विपक्षी विधायकों ने मीडिया और सोशल मीडिया में फैल रही अफवाहों को गंभीर मानते हुए तुरंत स्थिति पर नियंत्रण की मांग की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को वैक्सीन से जोड़ने की गलत सूचना आम हो गई थी। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन हो चुके हैं और हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों से किसी भी वैक्सीन का प्रत्यक्ष संबंध नहीं पाया गया है।
विपक्षी और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच लंबी बहस के बाद स्पष्टीकरण देने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि भ्रम और अफवाह फैलने से लोगों का वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों और अस्पतालों में भी इस विषय पर जागरूकता अभियान तेज किया जाएगा।
सदन में इस हंगामे के दौरान कुछ समय तक कार्यवाही स्थगित रही, लेकिन बाद में विधायकों की बैठक और स्वास्थ्य मंत्री के स्पष्टीकरण के बाद स्थिति शांत हुई। सदन में यह स्पष्ट किया गया कि जनता को केवल सरकारी और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेनी चाहिए और अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
राजस्थान विधानसभा में बुधवार का यह हंगामा यह दर्शाता है कि कोविड-19 के बाद भी वैक्सीन और स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चिंता अभी भी बनी हुई है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि सही जानकारी और जागरूकता के माध्यम से ही ऐसी भ्रांतियों को समाप्त किया जा सकता है।
इस घटना से यह भी स्पष्ट हुआ कि वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर जनता में विश्वास बनाए रखना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी जिम्मेदारी है।

