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राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान हंगामा, जनजातीय छात्रावास और विश्वविद्यालय विमर्श शुल्क पर सियासी बवाल

राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान हंगामा, जनजातीय छात्रावास और विश्वविद्यालय विमर्श शुल्क पर सियासी बवाल

राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान जोरदार हंगामा देखने को मिला। सदन में सबसे पहले जनजातीय छात्रावासों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति को लेकर प्रश्न उठे, जिसके बाद प्रदेश के तीन विश्वविद्यालयों में वसूले जा रहे विमर्श शुल्क के मुद्दे ने सदन में राजनीतिक गर्मी पैदा कर दी।

कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने सवाल उठाते हुए पूछा कि निजी विश्वविद्यालयों में स्वयंपाठी छात्रों से प्रति छात्र एक हजार रुपये का विमर्श शुल्क किन नियमों और प्रावधानों के तहत वसूला जा रहा है। यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस शुल्क की वसूली पारदर्शिता और छात्र हित के मानकों के खिलाफ हो रही है।

विधायक मनीष यादव के सवाल के बाद सदन में सरकार घिर गई। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वयंपाठी छात्रों से वसूला जा रहा यह शुल्क विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस शुल्क के उद्देश्य, नियम और वितरण प्रक्रिया को स्पष्ट करे।

इस दौरान सदन में हंगामा बढ़ गया। विपक्षी दलों ने मिलकर सरकार से जवाब तलब किया और इस मुद्दे पर गहन जांच और समीक्षा की मांग की। कुछ विधायक ने कहा कि अगर विश्वविद्यालयों में छात्र सुरक्षा और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना है, तो इस तरह के शुल्क के नियमों में सुधार अनिवार्य है।

सरकार के प्रवक्ता ने जवाब देते हुए कहा कि विमर्श शुल्क विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक और प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शुल्क की वसूली नियमों और नीति के तहत हो रही है और किसी भी प्रकार के अनियमित व्यवहार की शिकायत मिलने पर समुचित कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य की विधानसभा में इस तरह के सवाल और हंगामा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इससे न केवल छात्रों और नागरिकों के हित की रक्षा होती है, बल्कि सरकार को भी अपने निर्णयों और नीतियों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूर किया जाता है।

जनजातीय छात्रावास के मामले में भी हंगामा हुआ। सदन में यह मुद्दा उठाया गया कि छात्रावासों में समय पर खाद्य सामग्री और अन्य सुविधाओं की आपूर्ति नहीं हो रही, जिससे छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष ने सरकार से इस मुद्दे पर तुरंत सुधार और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।

इस तरह, राजस्थान विधानसभा में बुधवार को प्रश्नकाल हंगामेदार रहा। जनजातीय छात्रावासों में सुविधाओं की कमी और विश्वविद्यालयों में विमर्श शुल्क वसूली के मुद्दों ने सदन में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल पैदा कर दिया।

सदन में उठाए गए इन सवालों और हंगामे ने स्पष्ट कर दिया कि शैक्षणिक नीतियों और छात्र कल्याण से जुड़े मामलों में सरकार पर निरंतर निगरानी और जवाबदेही की जरूरत है। इसके साथ ही यह छात्रों और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा की सक्रिय भूमिका को भी उजागर करता है।

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