राजस्थान के बाड़मेर जिले के तेल उत्खनन क्षेत्र में हाल ही में भूमिगत ब्लास्ट ने एक बार फिर ग्रामीणों और किसानों के बीच दहशत फैलाई है। पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग इन धमाकों से परेशान हैं और उनका जीवन प्रभावित हो रहा है।
किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि ब्लास्ट की आवाज और झटके से घर, खेत और आम जीवन प्रभावित हो रहा है। कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों में दरारें पड़ने लगी हैं, पशु भयभीत हो रहे हैं और बच्चों को नींद में दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो उनकी खेती और जीवन पर गहरा असर पड़ेगा।
स्थानीय प्रशासन और तेल उत्खनन कंपनी के अधिकारी इस मामले की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारी बताते हैं कि ब्लास्ट का उद्देश्य तेल उत्खनन और भूगर्भीय शोध के लिए किया जा रहा है, लेकिन इसके प्रभावों को कम करने के लिए सुरक्षा और पर्यावरणीय उपायों को लागू करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूमिगत ब्लास्ट में जमीन और आसपास के पर्यावरण पर असर पड़ता है। यदि इसे नियमित अंतराल पर नियंत्रित और सावधानीपूर्वक नहीं किया गया, तो यह ग्रामीण जीवन और खेती के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि ब्लास्ट की आवृत्ति और समय का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और ग्रामीणों को पूर्व सूचना और सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी जाए।
इससे पहले भी बाड़मेर के तेल उत्खनन क्षेत्र में कई बार ब्लास्ट हुए हैं, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा और पर्यावरण के मुद्दे बार-बार उठते रहे हैं। ग्रामीण संगठन और किसान संघ इस दिशा में प्रशासन से निगरानी बढ़ाने और प्रभाव कम करने की मांग कर चुके हैं।
स्थानीय लोगों ने अपील की है कि ब्लास्ट के दौरान ध्वनि, धूल और झटकों के प्रभावों को कम करने के लिए आधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपायों का उपयोग किया जाए। उनका कहना है कि यदि यह ध्यान नहीं रखा गया, तो कृषि और ग्रामीण जीवन दोनों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
अंततः, राजस्थान के बाड़मेर जिले में भूमिगत ब्लास्ट ने ग्रामीण और किसानों के लिए चिंता का विषय बना दिया है। प्रशासन और तेल कंपनियों को मिलकर ऐसे उपाय करने होंगे, जिससे तेल उत्खनन जारी रहते हुए ग्रामीण जीवन और खेती सुरक्षित बनी रहे।

