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UGC का बड़ा एक्शन: अलवर का राजीव गांधी आईटी एंड मैनेजमेंट कॉलेज फर्जी घोषित, छात्रों को चेतावनी

UGC का बड़ा एक्शन: अलवर का राजीव गांधी आईटी एंड मैनेजमेंट कॉलेज फर्जी घोषित, छात्रों को चेतावनी

देशभर के छात्रों और अभिभावकों के लिए एक अहम चेतावनी जारी करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राजस्थान के अलवर जिले के भिवाड़ी में स्थित राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट को फर्जी संस्थान घोषित कर दिया है। आयोग ने शनिवार सुबह अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट के जरिए एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर इस संस्थान से दूर रहने की सख्त सलाह दी है।

यूजीसी द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यह संस्थान किसी भी प्रकार से मान्यता प्राप्त नहीं है और यहां से प्राप्त की गई डिग्री देश में कहीं भी वैध नहीं मानी जाएगी। आयोग ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे फर्जी संस्थानों में दाखिला लेना छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ साबित हो सकता है।

आयोग के मुताबिक, यह संस्थान लंबे समय से छात्रों को भ्रमित कर रहा था और खुद को वैध शिक्षण संस्थान के रूप में प्रस्तुत कर रहा था। जांच के बाद यह पाया गया कि कॉलेज के पास न तो आवश्यक मान्यता है और न ही यह किसी वैधानिक निकाय से संबद्ध है। ऐसे में यूजीसी ने इसे ‘फर्जी विश्वविद्यालय/संस्थान’ की सूची में शामिल करते हुए सख्त कदम उठाया है।

इस कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्जी संस्थान हर साल बड़ी संख्या में छात्रों को अपने जाल में फंसाते हैं, जिससे उनका समय, पैसा और करियर तीनों बर्बाद हो जाते हैं। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र इस तरह के संस्थानों के झांसे में जल्दी आ जाते हैं।

यूजीसी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की पूरी जांच कर लें। इसके लिए यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची को जरूर देखें। इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध संस्थान की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करने की भी सलाह दी गई है।

गौरतलब है कि यूजीसी समय-समय पर ऐसे फर्जी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की सूची जारी करता रहता है, ताकि छात्रों को जागरूक किया जा सके। आयोग का उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना और छात्रों को धोखाधड़ी से बचाना है।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसे संस्थान कैसे लंबे समय तक बिना मान्यता के संचालित होते रहते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या अतिरिक्त कदम उठाता है और दोषियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाती है।

फिलहाल, यूजीसी की इस चेतावनी के बाद छात्रों और अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि वे अपने भविष्य को सुरक्षित रख सकें और किसी भी तरह की शैक्षणिक धोखाधड़ी का शिकार न बनें।

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