शहर में ओएफसी (ऑप्टिकल फाइबर केबल) लाइन बिछाने के कार्य को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर क्षेत्र की सड़कों और फुटपाथों पर करोड़ों रुपए खर्च कर लगाई गई टाइल्स अब दोबारा खुदाई की वजह से खराब होने की आशंका में हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे सरकारी धन की बर्बादी बताया है।
जानकारी के अनुसार शहर में इंटरनेट और संचार सेवाओं को मजबूत करने के लिए ओएफसी लाइन डालने का काम शुरू किया गया है। इसके तहत विभिन्न प्रमुख मार्गों और कॉलोनियों में खुदाई की जा रही है। लेकिन जिन स्थानों पर खुदाई हो रही है, वहां कुछ समय पहले ही फुटपाथों का सौंदर्यीकरण कर करोड़ों रुपए की लागत से नई टाइल्स बिछाई गई थीं। अब इन्हीं फुटपाथों को तोड़कर केबल लाइन डाली जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण बार-बार निर्माण और खुदाई का काम हो रहा है। लोगों का आरोप है कि पहले करोड़ों रुपए खर्च कर फुटपाथ बनाए गए और अब ओएफसी लाइन के नाम पर उन्हें तोड़ा जा रहा है। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है बल्कि आमजन को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई जगहों पर फुटपाथों की टाइल्स उखाड़ दी गई हैं, जिससे पैदल चलने वालों को दिक्कत हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि खुदाई के कारण धूल और मलबे से बाजार क्षेत्रों में परेशानी बढ़ गई है। वहीं बारिश के दौरान ये खुदे हुए हिस्से दुर्घटना का कारण भी बन सकते हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि ओएफसी लाइन डालने की योजना पहले से थी तो फुटपाथ निर्माण से पहले ही संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जाना चाहिए था। बिना योजना के इस तरह बार-बार निर्माण कार्य करना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारियों का कहना है कि ओएफसी नेटवर्क शहर की डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के लिए जरूरी है। अधिकारियों ने दावा किया कि कार्य पूरा होने के बाद फुटपाथों को फिर से पूर्व स्थिति में व्यवस्थित कर दिया जाएगा। हालांकि नागरिकों को आशंका है कि दोबारा लगाई जाने वाली टाइल्स पहले जैसी गुणवत्ता और मजबूती की नहीं होंगी।
शहर में विकास कार्यों के नाम पर बार-बार खुदाई और निर्माण अब लोगों के बीच असंतोष का कारण बनता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि विभागों के बीच बेहतर तालमेल और दीर्घकालिक योजना बनाई जाए तो करोड़ों रुपए की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सकता है।

