7 अप्रैल को 70 किमी/घंटा की रफ्तार से अंधड़, भारी बारिश और ओलावृष्टि का खतरा; IMD ने जारी की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department) ने 7 अप्रैल को देश के कई हिस्सों में मौसम के बिगड़ने की चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार इस दिन 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज अंधड़ चलने, भारी बारिश होने और कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि (hailstorm) की भी संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों के कारण वातावरण में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके चलते कई राज्यों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश के दौर बनने की संभावना है।
विशेषकर राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में अचानक तेज हवाएं चलने से पेड़ गिरने, कच्चे मकानों को नुकसान और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान ओलावृष्टि का सबसे अधिक खतरा फसलों पर रहेगा। गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई जगह पहले से तैयार खड़ी फसलें इस अचानक बदलाव से प्रभावित हो सकती हैं।
IMD ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। खासकर खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की चेतावनी दी गई है। साथ ही, बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सुरक्षित उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।
स्थानीय प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके। आपदा प्रबंधन टीमों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग ने कहा है कि 7 अप्रैल की दोपहर से शाम के बीच मौसम सबसे अधिक अस्थिर रह सकता है। इस दौरान तेज धूल भरी आंधी के साथ अचानक बारिश के झोंके देखने को मिल सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रख लें और खेतों में रखी उपज को ढक दें, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति ने मौसम परिवर्तन के प्रभावों को और स्पष्ट कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की चरम मौसम घटनाएं अब अधिक सामान्य होती जा रही हैं।
फिलहाल सभी की नजरें 7 अप्रैल के मौसम पर टिकी हैं और प्रशासन ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखने की बात कही है।

