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सड़क हादसे के साढ़े तीन महीने बाद जवान ने तोड़ा दम, स्वतंत्रता दिवस पर ली अंतिम सांस; सैन्य सम्मान से अंतिम विदाई

सड़क हादसे के साढ़े तीन महीने बाद जवान ने तोड़ा दम, स्वतंत्रता दिवस पर ली अंतिम सांस; सैन्य सम्मान से अंतिम विदाई

राजस्थान में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए सेना के जवान ने करीब साढ़े तीन महीने तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद स्वतंत्रता दिवस पर अंतिम सांस ली। जवान के निधन की खबर मिलते ही उनके गांव में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा शामिल हुए। तिरंगा यात्रा निकालकर जवान को श्रद्धांजलि दी गई और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

बताया जा रहा है कि जवान कुछ महीने पहले सड़क हादसे का शिकार हुए थे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद उनका लंबे समय तक इलाज चला। परिवार और चिकित्सकों की कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।

साढ़े तीन महीने तक चला इलाज

सड़क हादसे के बाद जवान को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब साढ़े तीन महीने तक उनका इलाज चला। इस दौरान परिवार लगातार उनके स्वस्थ होने की उम्मीद लगाए बैठा था।

लेकिन स्वतंत्रता दिवस के दिन जवान ने जिंदगी की जंग हार दी। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। गांव के लोगों और जवान के साथियों में भी शोक की लहर दौड़ गई।

तिरंगा यात्रा में उमड़े ग्रामीण

जवान के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव लाया गया। जैसे ही पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़े।

युवाओं और ग्रामीणों ने तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर लोगों ने भारत माता और जवान के सम्मान में नारे लगाए। पूरे रास्ते देशभक्ति का माहौल बना रहा।

ग्रामीणों ने जवान के बलिदान और देश सेवा को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

जवान को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सेना के जवानों ने निर्धारित सैन्य परंपरा के अनुसार उन्हें सम्मान दिया। इस दौरान परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों की आंखें नम रहीं।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जवान को अंतिम विदाई देना पूरे क्षेत्र के लिए भावुक क्षण रहा। ग्रामीणों ने कहा कि जवान ने देश की सेवा की और उनकी बहादुरी तथा कर्तव्यनिष्ठा को हमेशा याद रखा जाएगा।

साढ़े तीन महीने तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद जवान का निधन परिवार के लिए बेहद दुखद है। वहीं, स्वतंत्रता दिवस पर हुई उनकी अंतिम विदाई ने पूरे गांव को भावुक कर दिया। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान के साथ विदाई देते समय हर किसी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम सलामी दी।

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