राजस्थान के नागौर जिले के सदर थाना क्षेत्र के बसवानी गांव में शुक्रवार देर शाम एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। घर के आंगन में बने पानी के टांके में गिरने से एक ही परिवार के तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां की हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के समय घर पर कोई और सदस्य मौजूद नहीं था। परिवार के सदस्यों का कहना है कि बच्चे खेलते-खेलते अचानक पानी के टांके में गिर गए। इस घटना ने पूरे गांव में मातम का माहौल पैदा कर दिया है।
मृत बच्चों में एक वर्षीय रूद्र और पांच वर्षीय जुड़वा बहनें गुंजन और अनुष्का शामिल हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चों को पानी से बाहर निकाला। हालांकि, तब तक बच्चों की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि उनकी मां को गंभीर हालत में निकटतम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि टांके के आसपास सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने आम जनता से सावधानी बरतने और घर के आंगन में सुरक्षित निर्माण करने की अपील की है, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परिवार सामान्य और शांतिपूर्ण जीवन जी रहा था। तीनों मासूम बच्चों की अचानक मौत ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। पड़ोसी और ग्रामीण परिवार के साथ खड़े हैं और उन्हें सांत्वना और मदद प्रदान कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के टांके और कुएँ जैसी जगहों के चारों ओर सुरक्षा उपायों की कमी अक्सर बच्चों के लिए खतरे का कारण बनती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर के आंगन में ऐसी जगहों पर सुरक्षा गार्ड और लोहे की रेलिंग जैसी व्यवस्थाएँ अवश्य करें।
इस घटना ने राज्य में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर जागरूकता की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन ने इस मामले में सख्त कार्रवाई और भविष्य में सुरक्षा उपायों को लागू करने की बात कही है।
स्थानीय अस्पताल और पुलिस ने बताया कि मां का इलाज चल रहा है और उसकी हालत अभी गंभीर है। परिवार और गांव के लोग इस घटना से गहरे सदमे में हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष निगरानी और सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।
इस तरह, नागौर जिले के बसवानी गांव में हुई यह दुखद घटना बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में संरचनाओं की सुरक्षा की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। प्रशासन और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।

