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राजस्थान में बारिश ने बिगाड़ा हजारों टन सरकारी अनाज, 2089 टन गेहूं-चावल खराब; FCI के आंकड़ों से खुलासा

राजस्थान में बारिश ने बिगाड़ा हजारों टन सरकारी अनाज, 2089 टन गेहूं-चावल खराब; FCI के आंकड़ों से खुलासा

: राजस्थान में सरकारी अनाज के रखरखाव को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में रखा 2089 टन अनाज बारिश में भीगकर खराब हो गया, जिससे राजस्थान इस मामले में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। यह जानकारी संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने दी।

लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में एफसीआई के गोदामों में रखा अनाज बारिश और अन्य कारणों से प्रभावित हुआ। इनमें राजस्थान में सबसे अधिक 2089 टन अनाज खराब होने का मामला सामने आया है।

रिपोर्ट के अनुसार खराब हुए अनाज में मुख्य रूप से गेहूं और चावल शामिल हैं, जिन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाना था। बारिश के कारण अनाज के खराब होने से सरकारी भंडारण व्यवस्था और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गोदामों में पर्याप्त सुरक्षा, वैज्ञानिक भंडारण और जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था होती, तो इतनी बड़ी मात्रा में अनाज को खराब होने से बचाया जा सकता था। अनाज का नुकसान न केवल सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ डालता है, बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि जब लाखों लोग सरकारी राशन पर निर्भर हैं, तब हजारों टन खाद्यान्न का खराब होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है। उन्होंने दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भंडारण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की मांग की है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि एफसीआई लगातार गोदामों की क्षमता बढ़ाने, आधुनिक भंडारण तकनीक अपनाने और अनाज की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। साथ ही जिन स्थानों पर नुकसान हुआ है, वहां कारणों की समीक्षा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राजस्थान में सबसे अधिक अनाज खराब होने का मामला सामने आने के बाद अब राज्य की भंडारण व्यवस्था और गोदामों की स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान अनाज की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता और आधुनिक वेयरहाउसिंग सिस्टम की जरूरत है, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए सुरक्षित रखा गया खाद्यान्न बर्बाद न हो।

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